ढाका: पड़ोसी देश बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की बदहाली के बीच अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का दौर लगातार जारी है। ताजा घटना में कट्टरपंथी भीड़ ने एक हिंदू शिक्षक के घर को निशाना बनाते हुए उसमें आग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले घर में लूटपाट की और फिर उसे आग के हवाले कर दिया। गनीमत रही कि हमले के समय परिवार के सदस्य अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहे, लेकिन घर का सारा सामान जलकर खाक हो गया है। यह घटना उस समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन और भारत सरकार लगातार बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील कर रहे हैं।
लक्षित हिंसा का बढ़ता दायरा
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से ही बांग्लादेश के विभिन्न जिलों में हिंदुओं के घरों, मंदिरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ गए हैं:
- शिक्षकों पर निशाना: हाल के दिनों में कई हिंदू शिक्षकों को जबरन इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया है या उनके साथ मारपीट की गई है। ताजा आगजनी की घटना इसी सिलसिले का हिस्सा मानी जा रही है।
- संपत्ति पर कब्जा: कई इलाकों से ऐसी खबरें आ रही हैं जहाँ अल्पसंख्यकों की जमीनों और संपत्तियों पर अवैध कब्जे की कोशिशें की जा रही हैं।
- दहशत का माहौल: ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हिंदू परिवार अब घरों से निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। कई परिवारों ने सुरक्षा के लिए स्थानीय मस्जिदों या सामुदायिक केंद्रों में शरण ली है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और भारत का रुख
अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों ने वैश्विक स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है:
- भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अत्यंत चिंतित है। नई दिल्ली लगातार ढाका के संपर्क में है ताकि वहां शांति बहाल की जा सके।
- मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट: एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य संगठनों ने हमलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- अंतरिम सरकार का आश्वासन: हालांकि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अल्पसंख्यकों की रक्षा का वादा किया है, लेकिन धरातल पर हिंसा की रुक-रुक कर हो रही घटनाएं इन वादों पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
स्थानीय सुरक्षा समितियों का गठन
हिंसा को रोकने के लिए कुछ जगहों पर स्थानीय छात्रों और नागरिकों ने ‘सुरक्षा समितियों’ का गठन किया है, जो रात के समय मंदिरों और अल्पसंख्यक बस्तियों की पहरेदारी कर रहे हैं। हालांकि, उन्मादी भीड़ के सामने ये प्रयास कई बार नाकाफी साबित हो रहे हैं। हिंदू समुदाय के नेताओं का कहना है कि जब तक पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नहीं होता, तब तक यह डर खत्म नहीं होगा।
निष्कर्ष: अस्तित्व का संकट
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी यह हिंसा न केवल एक मानवीय संकट है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए भी बड़ा खतरा है। हिंदू शिक्षक के घर में आगजनी जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अराजक तत्व समाज के सबसे सम्मानित वर्ग को भी निशाना बनाने से नहीं हिचक रहे हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर हैं कि वह कैसे इस सांप्रदायिक उन्माद पर लगाम कसती है।





