Saturday, January 31, 2026

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आयुर्वेद और AI का संगम: पतंजलि और IIT रुड़की ने आयोजित की अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी; स्वास्थ्य सेवाओं को ‘स्मार्ट’ बनाने और व्याधियों के सटीक निदान पर विशेषज्ञों का मंथन

हरिद्वार/रुड़की: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में पारंपरिक ज्ञान और अत्याधुनिक तकनीक को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से पतंजलि योगपीठ और IIT रुड़की के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी (International Symposium) का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘स्वास्थ्य सेवाओं में स्मार्ट तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अनुप्रयोग’ रहा। कार्यक्रम में दुनिया भर के वैज्ञानिकों, डेटा विशेषज्ञों और आयुर्वेद के विद्वानों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे AI के जरिए मरीजों के डेटा का विश्लेषण कर बीमारियों का समय से पहले पता लगाया जा सकता है और आयुर्वेद की प्रभावशीलता को डिजिटल प्रमाणों के साथ वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जा सकता है।

संगोष्ठी के मुख्य आकर्षण और विचार

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों पर चर्चा की गई:

  • स्मार्ट डायग्नोस्टिक्स: विशेषज्ञों ने बताया कि स्मार्ट वियरेबल डिवाइसेस (जैसे स्मार्ट वॉच और सेंसर) के जरिए हृदय गति, नींद के पैटर्न और तनाव के स्तर को ट्रैक कर आयुर्वेद के ‘त्रिदोष’ (वात, पित्त, कफ) के संतुलन को समझने में मदद मिल सकती है।
  • AI और ड्रग डिस्कवरी: IIT रुड़की के प्रोफेसरों ने यह साझा किया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों का तेजी से विश्लेषण किया जा सकता है, जिससे नई दवाओं के निर्माण में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
  • वैयक्तिकृत चिकित्सा (Personalized Medicine): संगोष्ठी में चर्चा हुई कि AI के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति (Body Constitution) के अनुसार सटीक आहार और चिकित्सा योजना तैयार की जा सकती है।

स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण का संबोधन

योग गुरु स्वामी रामदेव और पतंजलि के महासचिव आचार्य बालकृष्ण ने इस पहल को मानवता के लिए मील का पत्थर बताया:

  1. प्राचीन ज्ञान का आधुनिकीकरण: स्वामी रामदेव ने कहा कि आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं बल्कि एक पूर्ण विज्ञान है। इसे AI जैसी स्मार्ट तकनीक से जोड़कर हम दुनिया को एक सस्ता और स्थायी स्वास्थ्य मॉडल दे सकते हैं।
  2. डेटा आधारित आयुर्वेद: आचार्य बालकृष्ण ने जोर दिया कि पतंजलि और IIT रुड़की का यह शोध सहयोग आयुर्वेद को ‘एविडेंस बेस्ड’ (साक्ष्य आधारित) चिकित्सा पद्धति के रूप में वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

IIT रुड़की की तकनीकी विशेषज्ञता

IIT रुड़की के निदेशक ने इस साझेदारी के तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डाला:

  • सॉफ्टवेयर समाधान: संस्थान ऐसे सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम विकसित कर रहा है जो प्राचीन ग्रंथों में छिपे ज्ञान को डिजिटल डेटा में बदलकर आधुनिक लैब टेस्टिंग के साथ मैच कर सके।
  • प्रशिक्षण और शोध: यह संगोष्ठी शोधार्थियों के लिए एक ऐसा मंच बनी जहाँ वे स्वास्थ्य क्षेत्र की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए इंजीनियरिंग और आयुर्वेद के विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर सके।

 

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ, जिसमें तकनीक और आध्यात्मिकता के समन्वय से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान खोजने की बात कही गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पतंजलि का विशाल अनुभव और IIT रुड़की की तकनीकी क्षमता मिलकर आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और स्मार्ट बनाएगी।

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