Wednesday, March 4, 2026

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उत्तराखंड के बागवानों की हुई ‘चांदी’: एंटीहेल नेट पर अब मिलेगी 75 फीसदी सब्सिडी; धामी सरकार ने योजना को दी मंजूरी, ओलावृष्टि से सुरक्षित होंगी फसलें

देहरादून: उत्तराखंड में बागवानी को बढ़ावा देने और किसानों की आय को सुरक्षित करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने ‘एंटीहेल नेट’ (Anti-Hail Net) योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से अब बागवानों को अपनी फसल को ओलावृष्टि से बचाने के लिए केवल 25 प्रतिशत लागत ही वहन करनी होगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना के माध्यम से सेब, आड़ू, खुबानी और प्लम जैसे कीमती फलों के उत्पादन को प्राकृतिक आपदाओं से बचाया जा सके और राज्य की आर्थिकी को मजबूती दी जा सके।

क्यों जरूरी है एंटीहेल नेट?

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में ओलावृष्टि बागवानों के लिए सबसे बड़ा खतरा रही है:

  • फसल की सुरक्षा: ओलावृष्टि से फलों के पेड़ों की न केवल मौजूदा फसल बर्बाद होती है, बल्कि कलियां टूटने से अगले साल की पैदावार भी प्रभावित होती है।
  • गुणवत्ता और चमक: एंटीहेल नेट के उपयोग से फलों पर दाग-धब्बे नहीं पड़ते, जिससे बाजार में उन्हें बेहतर दाम मिलते हैं।
  • धूप से बचाव: ये जाल अत्यधिक तेज धूप और पक्षियों से भी फसल की रक्षा करते हैं।

सब्सिडी का नया गणित: बागवानों को सीधा फायदा

सब्सिडी की दर बढ़ने से छोटे और सीमांत किसानों के लिए इस तकनीक को अपनाना अब काफी आसान हो जाएगा:

  1. लागत का बोझ कम: मान लीजिए कि एक हेक्टेयर क्षेत्र में नेट लगाने की लागत ₹1,00,000 आती है, तो पहले बागवान को ₹50,000 खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब उसे मात्र ₹25,000 ही देने होंगे।
  2. शेष राशि का भुगतान: बाकी की 75 प्रतिशत राशि (यानी ₹75,000) राज्य और केंद्र सरकार मिलकर वहन करेंगी।
  3. पारदर्शी प्रक्रिया: उद्यान विभाग ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की है ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके।

उद्यान विभाग की तैयारी और आवेदन प्रक्रिया

सरकार ने उद्यान विभाग को निर्देश दिए हैं कि इस योजना का लाभ हर पात्र बागवान तक पहुंचे:

  • प्रथम आगमन-प्रथम सेवा: विभाग “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर आवेदनों का निस्तारण करेगा।
  • गुणवत्ता मानक: सरकार ने उन कंपनियों और गुणवत्ता मानकों को भी तय किया है, जिनके नेट बागवान खरीद सकेंगे ताकि सरकारी धन का सही उपयोग हो सके।
  • जागरूकता शिविर: ब्लॉक स्तर पर बागवानी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे किसानों के बीच जाकर इस बढ़ी हुई सब्सिडी के बारे में जानकारी दें।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में सेब के क्षेत्रफल को बढ़ाने और उत्पादकता (Productivity) में सुधार लाने के लिए यह योजना गेम-चेंजर साबित होगी। हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब उत्तराखंड के किसान भी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ओलों के डर के बिना खेती कर सकेंगे। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि उनकी सरकार का लक्ष्य 2026 तक उत्तराखंड को देश का अग्रणी ‘हॉर्टिकल्चर हब’ बनाना है और सब्सिडी में यह बढ़ोतरी उसी संकल्प का हिस्सा है।

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