Wednesday, March 4, 2026

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पोंगल के रंग में रंगे पीएम मोदी: कहा- ‘तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन और गौरवशाली धरोहर’; पोंगल उत्सव में लिया भाग, परंपराओं का किया सम्मान

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पोंगल के शुभ अवसर पर आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और तमिल सभ्यता की जमकर सराहना की। इस दौरान पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे महान सभ्यताओं में से एक है, जिस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पोंगल केवल एक फसल उत्सव नहीं है, बल्कि यह ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की उस भावना का प्रतीक है जो हमारे देश के विविध राज्यों को एक सूत्र में पिरोती है।

तमिल विरासत पर गर्व: पीएम के संबोधन की मुख्य बातें

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में तमिल भाषा और संस्कृति की प्राचीनता को रेखांकित किया:

  • वैश्विक पहचान: पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया की सबसे पुरानी भाषा तमिल का होना भारत का सौभाग्य है। उन्होंने वैश्विक मंचों पर भी तमिल संस्कृति और तिरुक्कुरल (Thirukkural) के उद्धरणों का जिक्र करने के अपने अनुभवों को साझा किया।
  • किसानों का आभार: उन्होंने कहा कि पोंगल हमारे अन्नदाताओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का पर्व है। भारत का विकास हमारे गांवों और किसानों की समृद्धि से ही संभव है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: पीएम ने काशी-तमिल संगमम और सौराष्ट्र-तमिल संगमम जैसे आयोजनों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर और दक्षिण के बीच का यह सांस्कृतिक सेतु देश की एकता को और मजबूत कर रहा है।

उत्सव का माहौल: पारंपरिक अंदाज में दिखे प्रधानमंत्री

नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में पोंगल की जीवंत परंपराओं की झलक देखने को मिली:

  1. पारंपरिक वेशभूषा: प्रधानमंत्री मोदी सफेद कमीज और पारंपरिक ‘मुंडू’ (धोती) के साथ कंधे पर अंगवस्त्रम धारण किए हुए नजर आए।
  2. सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने प्रसिद्ध ‘कोलाट्टम’ नृत्य और अन्य तमिल लोक कलाओं का प्रदर्शन किया, जिसका प्रधानमंत्री ने उत्साहवर्धन किया।
  3. सामुदायिक भोज: पीएम मोदी ने उपस्थित लोगों के साथ पोंगल का प्रसाद ग्रहण किया और वहां मौजूद कलाकारों एवं बच्चों के साथ बातचीत भी की।

पोंगल: प्रकृति और परंपरा का संगम

प्रधानमंत्री ने बताया कि किस तरह पोंगल का त्योहार प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को दर्शाता है:

  • मिट्टी और सूर्य का सम्मान: पोंगल के दौरान सूर्य देव और इंद्र देव की पूजा की जाती है, जो अच्छी फसल के लिए उत्तरदायी माने जाते हैं।
  • पशु प्रेम: उन्होंने ‘मट्टू पोंगल’ का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में मवेशियों को परिवार का हिस्सा माना जाता है और उनकी सेवा की जाती है।

निष्कर्ष: राष्ट्रीय एकता का संदेश

प्रधानमंत्री के इस पोंगल उत्सव में भाग लेने को राजनीतिक गलियारों में दक्षिण भारत के साथ उनके बढ़ते जुड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि जब हम पोंगल मनाते हैं, तो हम भारत की विविधता और सामूहिक शक्ति का जश्न मनाते हैं। यह त्योहार हमें सिखाता है कि हम सब अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों से होने के बावजूद एक ही जड़ से जुड़े हुए हैं।

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