Monday, January 12, 2026

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बीएमसी चुनाव की बिसात: धारावी पुनर्विकास पर उद्धव और राज ठाकरे हुए लामबंद; अदाणी समूह को लेकर सरकार पर साधा साझा निशाना

मुंबई/ब्यूरो: मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव के मद्देनजर महाराष्ट्र की सियासत में ‘ठाकरे बंधुओं’ के बीच एक अनौपचारिक एकजुटता दिखाई दे रही है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे ने अलग-अलग मंचों से लेकिन एक ही सुर में उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट को लेकर राज्य की महायुति सरकार पर हमला बोला है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीएमसी चुनाव से पहले मराठी अस्मिता और मुंबई के संसाधनों के मुद्दे पर दोनों भाई एक साथ खड़े होकर सत्ताधारी गठबंधन की घेराबंदी कर रहे हैं।

विवाद की जड़: धारावी पुनर्विकास परियोजना

दोनों नेताओं के निशाने पर मुख्य रूप से धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट (Dharavi Redevelopment Project) है, जिसका ठेका अदाणी समूह के पास है।

  • उद्धव ठाकरे का आरोप: उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार मुंबई की कीमती जमीन अदाणी समूह को ‘तश्तरी में सजाकर’ दे रही है। उन्होंने इसे मुंबई को लूटने की साजिश करार देते हुए कहा कि धारावी के निवासियों को उनके हक के घर वहीं मिलने चाहिए, न कि उन्हें शहर से बाहर भेजा जाए।
  • राज ठाकरे का हमला: राज ठाकरे ने भी अपनी शैली में सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर मुंबई के सारे बड़े प्रोजेक्ट्स एक ही समूह को क्यों दिए जा रहे हैं? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुंबई के भूमिपुत्रों के हितों की अनदेखी हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

अदाणी समूह को लेकर उठाए गए प्रमुख सवाल

  1. टीडीआर (TDR) का मुद्दा: दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए टीडीआर नियमों में बदलाव किए गए हैं, जिसका सीधा असर मुंबई के रियल एस्टेट मार्केट और आम आदमी पर पड़ेगा।
  2. मुंबई का व्यवसायीकरण: ठाकरे बंधुओं का तर्क है कि विकास के नाम पर मुंबई के मूल स्वरूप को बदलकर उसे चुनिंदा उद्योगपतियों के हवाले किया जा रहा है।
  3. मराठी कार्ड: चुनाव से पहले दोनों नेताओं ने इसे ‘मुंबई बनाम बाहरी’ का मुद्दा बनाकर मराठी मतदाताओं को एकजुट करने का प्रयास शुरू कर दिया है।

बीएमसी चुनाव पर क्या होगा असर?

मुंबई नगर निगम पर दशकों तक शिवसेना का कब्जा रहा है और इस बार का चुनाव उद्धव ठाकरे के लिए साख की लड़ाई है।

  • वोट बैंक की केमिस्ट्री: राज और उद्धव का एक ही मुद्दे पर हमलावर होना भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
  • रणनीतिक बढ़त: हालांकि दोनों पार्टियों के गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अदाणी के मुद्दे पर उनकी ‘एक दिशा’ यह संकेत देती है कि चुनाव में वे एक-दूसरे के वोटों को काटने के बजाय साझा दुश्मन (सत्ताधारी गठबंधन) पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

सरकार और अदाणी समूह का पक्ष

विपक्ष के इन हमलों पर पलटवार करते हुए राज्य सरकार के मंत्रियों ने कहा है कि धारावी प्रोजेक्ट दुनिया का सबसे बड़ा स्लम पुनर्विकास अभियान है, जिससे लाखों लोगों का जीवन सुधरेगा। अदाणी समूह ने भी पहले स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और सभी नियमों का पालन किया जा रहा है।

निष्कर्ष: मुंबई की जंग हुई तेज

अदाणी समूह के बहाने उद्धव और राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव के लिए एक बड़ा नैरेटिव सेट कर दिया है। अब देखना यह होगा कि ‘विकास बनाम अस्मिता’ की इस लड़ाई में मुंबई की जनता किसे अपना समर्थन देती है।

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