इंदौर/ब्यूरो: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और स्वच्छता में नंबर एक शहर इंदौर के एक हिस्से में दूषित पेयजल ने मौत का तांडव मचा रखा है। प्रभावित इलाके में आज एक और मरीज ने दम तोड़ दिया, जिससे इस त्रासदी में मरने वालों की कुल संख्या 22 तक पहुंच गई है। पिछले कई दिनों से जारी मौतों के इस सिलसिले ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है, लेकिन धरातल पर अब भी दहशत का माहौल है।
कैसे फैली यह त्रासदी?
जांच में सामने आया है कि शहर के प्रभावित क्षेत्रों (विशेषकर घनी आबादी वाली बस्तियों) में पेयजल की पाइपलाइन में गंदे नाले का पानी मिल गया है।
- पाइपलाइनों में लीकेज: कई स्थानों पर पानी की पुरानी पाइपलाइनें सीवर लाइनों के बेहद करीब से गुजर रही हैं। लीकेज के कारण पीने के पानी में मल और नाले का गंदा पानी मिल गया, जो इस जानलेवा बीमारी का मुख्य कारण बना।
- अस्पतालों में बढ़ती भीड़: दूषित पानी के कारण शहर के एमवाई अस्पताल और अन्य निजी क्लिनिकों में उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और संक्रमण के सैकड़ों मरीज भर्ती हैं।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल
स्वच्छता रैंकिंग में लगातार शीर्ष पर रहने वाले इंदौर में इतनी बड़ी संख्या में मौतों ने नगर निगम की साख पर बट्टा लगा दिया है।
- देरी से जागना: निवासियों का आरोप है कि पहली मौत के तुरंत बाद शिकायत की गई थी, लेकिन निगम अधिकारियों ने पाइपलाइन ठीक करने और पानी की सप्लाई रोकने में कई दिन लगा दिए।
- क्लोरीन और टेस्टिंग का अभाव: जांच में पाया गया कि कई इलाकों में सप्लाई किए जा रहे पानी में क्लोरीन की मात्रा मानकों से बहुत कम थी और जल शोधन संयंत्रों (Water Treatment Plants) की नियमित मॉनिटरिंग नहीं की जा रही थी।
मुख्यमंत्री की सख्ती और जांच के आदेश
22वीं मौत के बाद सरकार एक्शन मोड में आ गई है।
- दोषियों पर कार्रवाई: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों की लापरवाही से यह त्रासदी हुई है, उन्हें किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। संबंधित क्षेत्र के जल कार्य विभाग के कुछ इंजीनियरों को सस्पेंड करने की तैयारी की जा रही है।
- टैंकरों से सप्लाई: फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में नल की सप्लाई बंद कर दी गई है और नगर निगम टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध करा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी
डॉक्टरों ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे पानी को उबालकर ही पिएं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और ओआरएस (ORS) के पैकेट वितरित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक गंभीर ‘वाटर-बोर्न आउटब्रेक’ है, जिसे नियंत्रित करने में अभी कुछ और दिन लग सकते हैं।
निष्कर्ष: सुलगते सवाल
इंदौर की यह त्रासदी एक बड़ा सबक है कि केवल बाहरी सफाई से शहर ‘स्मार्ट’ नहीं बनते; जब तक बुनियादी ढांचा जैसे कि पेयजल प्रणाली सुरक्षित नहीं होगी, नागरिकों की जान दांव पर लगी रहेगी। 22 मौतों ने यह साबित कर दिया है कि इंदौर के प्रशासनिक अमले को अपनी प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है।





