Monday, January 12, 2026

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इंदौर में सिस्टम पर सवाल: स्वच्छ पानी के लिए ₹2450 करोड़ खर्च, फिर भी दूषित जल ने ली 20 जान

इंदौर/ब्यूरो: देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव रखने वाले इंदौर से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। एक ओर जहां प्रशासन ने शहर में शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2450 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, वहीं दूसरी ओर दूषित पानी पीने से अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को जहरीला पानी मिलने से नगर निगम और जल कार्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं।

बजट और दावों की खुली पोल

इंदौर नगर निगम ने शहर की पेयजल व्यवस्था को सुधारने और नर्मदा परियोजना के विभिन्न चरणों को लागू करने के लिए अरबों रुपये की राशि खर्च की है।

  • कागजी विकास: सरकारी आंकड़ों में शहर के लगभग हर हिस्से में नई पाइपलाइन बिछाने और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) के आधुनिकीकरण का दावा किया गया था।
  • जमीनी हकीकत: रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में पीने के पानी की पाइपलाइनें सीवरेज लाइनों के साथ मिली हुई हैं, जिसके कारण घरों में पहुंचने वाला पानी जानलेवा साबित हो रहा है।

महामारी की तरह फैला संक्रमण

पिछले कुछ हफ्तों में शहर की कई बस्तियों में उल्टी, दस्त और हैजा के मामले तेजी से बढ़े हैं।

  • मौतों का सिलसिला: दूषित पानी के सेवन से बीमार होने वाले लोगों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है, जिनमें से 20 लोग इलाज के दौरान दम तोड़ चुके हैं। मृतकों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या अधिक है।
  • अस्पतालों में भीड़: शहर के एमवाई (MY) अस्पताल और जिला अस्पतालों में जलजनित रोगों (Waterborne Diseases) से पीड़ित मरीजों की कतारें लगी हुई हैं।

प्रशासनिक लापरवाही और जनता का आक्रोश

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पानी के गंदा और बदबूदार होने की शिकायतें कई बार निगम अधिकारियों से की गई थीं, लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया गया।

  • मिश्रित पाइपलाइन: जांच में पाया गया कि पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइनों में लीकेज होने के कारण गंदा नाली का पानी पेयजल में मिल रहा है।
  • जांच के आदेश: भारी जन आक्रोश के बाद जिला प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। दोषी इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

निष्कर्ष: स्वच्छता रैंकिंग और जनस्वास्थ्य का विरोधाभास

इंदौर सात बार से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है, लेकिन 2450 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी 20 मौतों का आंकड़ा इस उपलब्धि पर काला धब्बा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सड़कों की सफाई स्वच्छता नहीं है, बल्कि नागरिकों को शुद्ध पेयजल और सुरक्षित सीवरेज सिस्टम देना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है।

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