हरिद्वार: विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने धर्मनगरी हरिद्वार की पवित्रता और मर्यादा को लेकर एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। विहिप ने पुरजोर मांग की है कि हरिद्वार के सभी गंगा घाटों और आगामी कुंभ मेला क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। संगठन का तर्क है कि यह मांग हिंदू धर्म की आस्था और तीर्थस्थलों की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
आस्था और मर्यादा का हवाला
विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि हरिद्वार हिंदुओं का परम पावन तीर्थ स्थल है। उन्होंने तर्क दिया कि जिन लोगों की हिंदू धर्म, देवी-देवताओं और गंगा के प्रति कोई श्रद्धा नहीं है, उनका इन पवित्र स्थलों पर आना केवल पर्यटन का विषय नहीं होना चाहिए। विहिप के अनुसार, अक्सर पवित्र घाटों पर ऐसी गतिविधियां देखने को मिलती हैं जो हिंदू धर्म की मान्यताओं के विपरीत होती हैं, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती हैं।
कुंभ क्षेत्र को लेकर विशेष आग्रह
आगामी आयोजनों को देखते हुए विहिप ने स्पष्ट किया कि कुंभ मेला क्षेत्र कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक समागम है। संगठन का कहना है कि कुंभ क्षेत्र की परिधि में केवल उन्हीं लोगों को व्यापार या सेवा की अनुमति मिलनी चाहिए जो सनातन धर्म में विश्वास रखते हों। विहिप ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों पर ‘प्रवेश वर्जित’ के बोर्ड लगाए जाएं और संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए सख्त चेकिंग अभियान चलाया जाए।
प्रशासन और सरकार से अपील
विहिप के प्रांतीय नेताओं ने उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशासन से इस दिशा में कठोर नियम बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्य धर्मों के पवित्र स्थलों पर मर्यादाओं का पालन किया जाता है, ठीक वैसे ही व्यवस्था हरिद्वार के हर की पैड़ी और अन्य घाटों पर भी होनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन इस दिशा में कदम नहीं उठाता है, तो परिषद स्वयं अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से जन-जागरण अभियान चलाएगी।
बढ़ती जनसांख्यिकी और सुरक्षा पर चिंता
मांग के पीछे सुरक्षा और जनसांख्यिकी परिवर्तन के कारणों को भी गिनाया गया है। विहिप का आरोप है कि तीर्थ क्षेत्रों के आसपास अनधिकृत रूप से बस रहे लोग वहां की शांति और संस्कृति के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। उन्होंने ‘लैंड जिहाद’ जैसी चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि तीर्थ स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गैर-हिंदुओं का सत्यापन और प्रवेश पर रोक अनिवार्य है।





