Monday, January 12, 2026

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कूड़ा प्रबंधन: हल्द्वानी नगर निगम अब दूसरे शहरों से मंगाएगा कचरा, रोजाना 400 मीट्रिक टन की जरूरत

हल्द्वानी। हल्द्वानी नगर निगम ने शहर की स्वच्छता और कूड़ा निस्तारण को लेकर एक अनूठी और महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। गौलापार स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में लगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट या प्रोसेसिंग यूनिट को पूरी क्षमता से चलाने के लिए अब बाहरी शहरों से कूड़ा मंगाया जाएगा। निगम ने निर्णय लिया है कि पहले स्थानीय कचरे का वजन किया जाएगा और कमी होने पर दूसरे शहरों से कचरे का स्टॉक हल्द्वानी लाया जाएगा।

रोजाना 400 मीट्रिक टन कचरे का लक्ष्य

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, कूड़ा निस्तारण प्लांट को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रतिदिन लगभग 400 मीट्रिक टन कचरे की आवश्यकता है। वर्तमान में हल्द्वानी शहर से निकलने वाला कचरा इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। प्लांट की मशीनरी अपनी पूरी क्षमता पर तभी काम कर सकती है जब उसे निर्धारित मात्रा में इनपुट मिले। इसी कमी को दूर करने के लिए आसपास के नगर निकायों और शहरों से संपर्क किया जा रहा है।

पहले होगा वजन, फिर होगी एंट्री

निगम ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त मानक तय किए हैं। हल्द्वानी की सीमा में प्रवेश करने वाले हर कचरे के ट्रक को पहले धर्मकांटे पर तौला जाएगा। वजन सुनिश्चित होने के बाद ही उसे प्लांट तक ले जाने की अनुमति दी जाएगी। इस प्रक्रिया से यह स्पष्ट रहेगा कि किस शहर से कितना कूड़ा आ रहा है और प्लांट की रोजाना की खपत कितनी हो रही है।

क्लस्टर आधारित प्रबंधन पर जोर

इस योजना के तहत हल्द्वानी को एक ‘क्लस्टर सेंटर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत नैनीताल, भवाली, भीमताल और लालकुआं जैसे नजदीकी नगर निकायों का कूड़ा भी हल्द्वानी लाया जा सकता है। इससे न केवल छोटे शहरों को कूड़ा निस्तारण की समस्या से मुक्ति मिलेगी, बल्कि हल्द्वानी के प्लांट को निरंतर कच्चा माल (कूड़ा) मिलता रहेगा, जिससे खाद या बिजली उत्पादन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा।

पर्यावरण और राजस्व को लाभ

नगर निगम का मानना है कि इस कदम से दोहरे फायदे होंगे। पहला, क्षेत्र में कचरे के पहाड़ों (लिगेसी वेस्ट) से मुक्ति मिलेगी और दूसरा, बाहरी निकायों से कूड़ा लेने के बदले निगम ‘यूनिट चार्ज’ या ‘टिपिंग फीस’ वसूल सकेगा, जिससे निगम के राजस्व में वृद्धि होगी। अधिकारियों का कहना है कि कूड़ा प्रबंधन की यह आधुनिक तकनीक हल्द्वानी को भविष्य में एक ‘जीरो वेस्ट’ शहर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

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