नई दिल्ली: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में मचे राजनीतिक घमासान और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद भारत ने पहली बार अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति को लेकर “चिंतित” है और वहां के घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।
लोकतांत्रिक स्थिरता पर भारत का जोर
एक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि वेनेजुएला के साथ भारत के पुराने और घनिष्ठ संबंध रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी भी देश में राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव न केवल वहां की जनता पर पड़ता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय शांति पर भी इसका असर होता है। जयशंकर ने उम्मीद जताई कि वेनेजुएला के राजनीतिक संकट का समाधान वहां के संवैधानिक दायरे और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से निकाला जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की चिंता के पीछे प्रमुख कारण वेनेजुएला में फंसे भारत के आर्थिक हित हैं।
- तेल आयात: वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात पर निर्भर रहा है।
- बकाया भुगतान: भारतीय तेल कंपनियों (जैसे ONGC विदेश लिमिटेड) का वेनेजुएला में करोड़ों डॉलर का लाभांश और निवेश बकाया है। राजनीतिक अस्थिरता के कारण इस भुगतान प्रक्रिया में और देरी होने की आशंका है।
क्या है वेनेजुएला का संकट?
विदित हो कि वेनेजुएला पिछले काफी समय से चुनावी विवादों और आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। हाल ही में विपक्षी दलों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच नाटकीय घटनाक्रम में निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया है। उन पर चुनाव में धांधली और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे हैं। अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने इस बदलाव का समर्थन किया है, जबकि कुछ देश इसे “तख्तापलट” करार दे रहे हैं।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वेनेजुएला में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा भारत सरकार की प्राथमिकता है। काराकास (वेनेजुएला की राजधानी) स्थित भारतीय दूतावास को अलर्ट पर रखा गया है और भारतीय नागरिकों को सुरक्षा परामर्श जारी किए गए हैं।
भारत ने फिलहाल किसी भी पक्ष का खुला समर्थन करने के बजाय “प्रतीक्षा करो और देखो” (Wait and Watch) की नीति अपनाई है, जो भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति का हिस्सा है।





