नई दिल्ली।
नववर्ष 2026 की शुरुआत खगोल विज्ञान के प्रेमियों के लिए एक दुर्लभ और मनोहारी दृश्य लेकर आ रही है। 3 जनवरी 2026 को आकाश में दिखाई देगा वुल्फ सुपरमून, जो इस वर्ष चंद्रमा द्वारा प्रदर्शित की जा सकने वाली सबसे अधिक चमक और आकार के निकट होगा। यह खगोलीय घटना कई अनुकूल परिस्थितियों के एक साथ आने का परिणाम है, जिससे यह पूर्णिमा सामान्य पूर्ण चंद्रमा की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली दिखाई देगी।
क्या है सुपरमून?
सुपरमून वह स्थिति होती है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपनी कक्षा के उस बिंदु पर होता है, जहाँ वह पृथ्वी के सबसे अधिक निकट होता है। इस निकटतम बिंदु को पेरीजि (Perigee) कहा जाता है। चंद्रमा की कक्षा पूर्णतः गोल नहीं, बल्कि थोड़ी अंडाकार है। इसी कारण कभी वह पृथ्वी के अपेक्षाकृत पास और कभी दूर होता है।
कितनी नज़दीक होगा चंद्रमा?
3 जनवरी 2026 को चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3,62,312 किलोमीटर की दूरी पर होगा। इस दूरी पर चंद्रमा:
- सामान्य स्थिति की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत बड़ा
- और लगभग 30 प्रतिशत अधिक चमकीला
दिखाई दे सकता है।
हालाँकि यह दूरी दिसंबर 2025 में आए कोल्ड सुपरमून से थोड़ी अधिक है, लेकिन इस बार एक और खगोलीय संयोग इसकी चमक को और बढ़ा देगा।
पेरीहेलियन का अतिरिक्त प्रभाव
इस वुल्फ सुपरमून की विशेषता यह भी है कि यह पृथ्वी के पेरीहेलियन (Perihelion) के बेहद करीब घटित होगा। पेरीहेलियन वह बिंदु होता है, जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है। इस दौरान पृथ्वी, सूर्य से अपनी अधिकतम दूरी की तुलना में लगभग 3.4 प्रतिशत अधिक करीब होती है।
इसका सीधा अर्थ है कि सूर्य से निकलने वाली रोशनी थोड़ी अधिक मात्रा में पृथ्वी-चंद्रमा प्रणाली तक पहुँचती है, जिससे चंद्रमा की चमक में हल्की लेकिन स्पष्ट वृद्धि होती है। यही कारण है कि 3 जनवरी का वुल्फ सुपरमून असाधारण रूप से उज्ज्वल दिखाई देने की संभावना रखता है।
‘वुल्फ मून’ नाम का अर्थ
जनवरी की पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से वुल्फ मून कहा जाता है। माना जाता है कि उत्तरी अमेरिका और यूरोप के ठंडे इलाकों में सर्दियों के दौरान भेड़ियों की आवाज़ें अधिक सुनाई देती थीं, इसी कारण इस पूर्णिमा को यह नाम दिया गया। यह नाम खगोल विज्ञान से अधिक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़ा है।
जनवरी की रातें: अवलोकन के लिए अनुकूल
खगोलविदों के अनुसार, जनवरी की ठंडी हवा में आर्द्रता कम होती है, जिससे आकाश अधिक साफ़ और पारदर्शी रहता है। ऐसे में यदि मौसम अनुकूल रहा और बादल नहीं हुए, तो उत्तर गोलार्ध में यह सुपरमून देखने के लिए परिस्थितियाँ लगभग आदर्श होंगी।
इस खगोलीय दृश्य को देखने के लिए:
- किसी दूरबीन या विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं
- नग्न आँखों से ही इसे आसानी से देखा जा सकता है
- शहरों से दूर, खुले और कम प्रकाश-प्रदूषण वाले स्थान बेहतर माने जाते हैं
वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व
सुपरमून कोई दुर्लभ खगोलीय चमत्कार नहीं, बल्कि चंद्रमा की कक्षा की स्वाभाविक विशेषता है। फिर भी, जब पेरीजि, पूर्णिमा और पेरीहेलियन जैसी स्थितियाँ एक साथ आती हैं, तो यह घटना वैज्ञानिकों और आम दर्शकों—दोनों के लिए विशेष बन जाती है। यह हमें पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य के आपसी संबंधों को समझने का एक जीवंत अवसर प्रदान करती है।
प्रकृति का शांत चमत्कार
3 जनवरी 2026 का वुल्फ सुपरमून केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा प्रस्तुत किया गया एक शांत और सौंदर्यपूर्ण अनुभव है। आधुनिक जीवन की तेज़ रफ्तार के बीच, यह क्षण हमें कुछ देर रुककर आकाश की ओर देखने और ब्रह्मांड की विशालता का अनुभव करने का अवसर देता है।





