लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए शासन स्तर पर कड़े तेवर दिखाए हैं। राजधानी लखनऊ में वित्त विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी विभागों को आवंटित बजट को समयबद्ध तरीके से खर्च करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन बजट का उपयोग समय पर और पारदर्शी तरीके से होना अनिवार्य है।
विकास कार्यों में तेजी लाने का आह्वान
बैठक में मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ चालू वित्तीय वर्ष के आय-व्यय की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने पाया कि कुछ विभागों में बजट खर्च की गति धीमी है, जिस पर उन्होंने असंतोष व्यक्त किया।
- समय सीमा का पालन: मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं में देरी होने से न केवल उनकी लागत बढ़ती है, बल्कि जनता को उनका लाभ भी समय पर नहीं मिल पाता।
- विभागीय जवाबदेही: सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा करें और सुनिश्चित करें कि आवंटित राशि का सदुपयोग हो रहा है।
राजस्व संग्रह और वित्तीय अनुशासन पर जोर
सीएम योगी ने राज्य की आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करने के लिए राजस्व संग्रह (Revenue Collection) के लक्ष्यों को समय से पूरा करने पर जोर दिया।
- जीएसटी और वैट: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चोरी रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए।
- मितव्ययिता और अनुशासन: उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाई जाए और वित्तीय अनुशासन को हर हाल में बनाए रखा जाए।
अंतिम छोर तक पहुंचे लाभ
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बजट को प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि “डबल इंजन” सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कल्याणकारी योजनाओं का पैसा सीधे और प्रभावी ढंग से लाभार्थियों तक पहुँचे।
अधिकारियों को कड़ी चेतावनी
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी विभाग में लापरवाही या अनावश्यक देरी के कारण बजट लैप्स (Lapse) होता है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने वित्त विभाग को निर्देश दिया कि वे अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें ताकि फाइलों का निस्तारण तेजी से हो सके।
निष्कर्ष: सीएम योगी की इस सक्रियता को प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक सभी प्रमुख लक्ष्य पूरे कर लिए जाएं।





