देहरादून: उत्तराखंड में ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसके तहत अब बिजली की दरें स्मार्ट मीटरों के माध्यम से निर्धारित की जाएंगी। राज्य सरकार और ऊर्जा निगम (UPCL) प्रदेश में ‘टाइम ऑफ डे’ (ToD) टैरिफ व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। इस नई व्यवस्था के तहत दिन के अलग-अलग समय के आधार पर बिजली की दरें भी अलग-अलग होंगी।
क्या है नई व्यवस्था और पीक आवर्स का गणित?
नई नीति के अनुसार, पूरे दिन को अलग-अलग स्लॉट्स में बांटा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ‘पीक आवर्स’ (शाम के समय जब बिजली की मांग सबसे अधिक होती है) को लेकर है। पीक आवर्स के दौरान बिजली का उपयोग करना महंगा हो जाएगा। इसके विपरीत, दिन के समय जब सौर ऊर्जा की उपलब्धता अधिक होती है, दरों में राहत मिलने की संभावना है।
स्मार्ट मीटर की भूमिका
इस पूरी व्यवस्था का आधार स्मार्ट मीटर होंगे। ये मीटर न केवल रीयल-टाइम में बिजली की खपत को रिकॉर्ड करेंगे, बल्कि यह भी दर्ज करेंगे कि किस समय कितनी बिजली खर्च की गई है।
- सटीक बिलिंग: अब मैन्युअल रीडिंग की जरूरत नहीं होगी, जिससे बिलिंग में होने वाली गलतियों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
- प्रीपेड सुविधा: उपभोक्ता अपने मोबाइल की तरह ही बिजली को रिचार्ज कर सकेंगे, जिससे वे अपने बजट के अनुसार बिजली का उपयोग कर पाएंगे।
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
- व्यवहार में बदलाव: उपभोक्ताओं को अब भारी उपकरण (जैसे वॉशिंग मशीन, गीजर या एसी) पीक आवर्स के बजाय सामान्य घंटों में चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वे भारी बिल से बच सकें।
- पारदर्शिता: स्मार्ट मीटर के जरिए लोग अपने मोबाइल ऐप पर देख सकेंगे कि कौन सा उपकरण कितनी बिजली खा रहा है।
- औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता: शुरुआत में यह व्यवस्था बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर लागू की जा सकती है, जिसके बाद इसे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य किया जाएगा।
ऊर्जा निगम का तर्क
ऊर्जा निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी। पीक आवर्स में बिजली की मांग बढ़ने पर निगम को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। नई दरों के लागू होने से लोग पीक आवर्स में कम बिजली इस्तेमाल करेंगे, जिससे सिस्टम पर दबाव कम होगा और लाइन लॉस में भी कमी आएगी।





