संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के उद्देश्य से रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक अहम सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेते हुए अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और मुद्दों को सामने रखा। बैठक का मकसद सत्र से पहले सरकार और विपक्ष के बीच संवाद स्थापित करना और संभावित विवादित विषयों पर पहले से सहमति बनाने का था।
बैठक के दौरान सरकार की ओर से यह उम्मीद जताई गई कि शीतकालीन सत्र रचनात्मक और उत्पादक तरीके से आगे बढ़ेगा। हालांकि, विपक्षी दलों ने संकेत दिए कि वे कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की मांग के साथ सदन में जोरदार तरीके से अपनी बात उठाएंगे। इससे सत्र के हंगामेदार रहने के संकेत मिल रहे हैं। विपक्ष ने विशेष रूप से आर्थिक हालात, महंगाई, बेरोजगारी, राष्ट्रीय सुरक्षा और हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को प्राथमिकता से उठाने की बात कही।
राजनाथ सिंह ने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहां देशहित से जुड़े मुद्दों पर स्वस्थ चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार प्रत्येक मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, बशर्ते संवाद नियमों और मर्यादाओं के भीतर रहे। उन्होंने कहा कि संसद की गरिमा को बनाए रखना सभी दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वहीं, विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अक्सर महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचती है, इसलिए वे इस बार किसी भी हाल में अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। कई दलों ने कहा कि सरकार को विपक्ष की आवाज दबाने की बजाय विस्तृत बहस के लिए तैयार रहना चाहिए। बैठक में किसान मुद्दों, सीमा सुरक्षा, संवैधानिक संस्थाओं पर उठ रहे सवालों और कई राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी चर्चा की संभावनाओं का संकेत मिला।
सर्वदलीय बैठक समाप्त होने के बाद यह साफ हो गया कि शीतकालीन सत्र कई बार टकराव और तीखी बहसों का साक्षी बन सकता है। हालांकि सरकार की ओर से सहयोग और संवाद का संदेश दिया गया है, लेकिन विपक्ष के तेवर इस ओर इशारा कर रहे हैं कि सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर जोरदार राजनीतिक मंथन देखने को मिलेगा।





