वॉशिंगटन।
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने यूरोप में सक्रिय चार वामपंथी कट्टरपंथी समूहों को आधिकारिक रूप से विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी आदेश में इन समूहों पर बम धमाकों, हिंसक चरमपंथी गतिविधियों और नागरिकों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह कदम यूरोप और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
विदेश विभाग के मुताबिक, पिछले कई वर्षों में इन संगठनों से जुड़े तत्वों ने सरकारी प्रतिष्ठानों, दूतावासों, निजी कंपनियों और मीडिया हाउसों पर हमले किए हैं। कुछ मामलों में पुलिस और सुरक्षा बलों को भी निशाना बनाया गया। विभाग का कहना है कि जांच एजेंसियों को इन समूहों की गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, फंडिंग चैनल और हथियारों की आपूर्ति के साक्ष्य मिले हैं।
अधिकारियों के अनुसार, आतंकी घोषित होने के बाद इन समूहों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियों को जब्त किया जाएगा, उनके साथ किसी भी प्रकार का वित्तीय या तकनीकी सहयोग अपराध की श्रेणी में आएगा, और संबंधित व्यक्तियों की यात्रा पर भी प्रतिबंध लागू होगा। अमेरिकी प्रशासन ने यूरोपीय देशों से इन संगठनों पर सख्त कार्रवाई करने और साझा खुफिया तंत्र को और मजबूत बनाने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में यूरोप में वामपंथी और दक्षिणपंथी—दोनों तरह के चरमपंथी समूहों की सक्रियता बढ़ी है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता गहरी हो गई है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम चरमपंथ के सभी रूपों पर कठोर रुख अपनाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
यूरोपीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन संगठनों को आतंकी सूची में डालने से सीमापार गतिविधियों पर अंकुश लगेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को और मजबूती मिलेगी।





