Sunday, February 8, 2026

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रूस ने लॉन्च की ‘खाबरोवस्क’ परमाणु पनडुब्बी, पोसाइडन ड्रोन से लैस हथियार प्रणाली से बढ़ी वैश्विक चिंता

मॉस्को। रूस ने एक बार फिर अपनी सामरिक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी ‘खाबरोवस्क’ (Khabarovsk) को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। यह पनडुब्बी रूस की सबसे गोपनीय और उन्नत परमाणु पनडुब्बियों में से एक बताई जा रही है, जो ‘पोसाइडन’ परमाणु-संचालित ड्रोन टॉरपीडो से लैस है। इस हथियार प्रणाली की खासियत यह है कि यह एक ही हमले में पूरे तटीय शहर को खाक में बदलने की क्षमता रखती है।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इसकी लॉन्चिंग की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, यह पनडुब्बी सेवमाश शिपयार्ड में तैयार की गई है और इसे रूसी नौसेना की रणनीतिक परमाणु बलों में शामिल किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि खाबरोवस्क रूस की नई पीढ़ी की ‘बोरेई-क्लास’ पनडुब्बी है, जो गहरे समुद्र में लंबे समय तक रहकर कार्रवाई करने में सक्षम है।

रूस द्वारा विकसित ‘पोसाइडन’ (Poseidon) को दुनिया का सबसे घातक पानी के भीतर संचालित परमाणु ड्रोन टॉरपीडो माना जाता है। यह ड्रोन सैकड़ों किलोमीटर तक चल सकता है और समुद्र के भीतर से परमाणु विस्फोट कर विशाल रेडियोधर्मी सुनामी उत्पन्न कर सकता है, जो तटीय शहरों को पूरी तरह तबाह करने में सक्षम है।

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि खाबरोवस्क पनडुब्बी में ऐसे छह पोसाइडन ड्रोन ले जाने की क्षमता है। प्रत्येक ड्रोन में 100 मेगाटन तक की विनाशक शक्ति हो सकती है — जो द्वितीय विश्व युद्ध में हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से करीब 2,000 गुना अधिक ताकतवर है।

रूस की इस नई रणनीतिक तैनाती से अमेरिका और नाटो देशों में चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने कहा है कि पोसाइडन प्रणाली “न्यूक्लियर डिटरेंस के संतुलन को अस्थिर कर सकती है”, क्योंकि इसे पहचानना और रोकना बेहद मुश्किल है।

नाटो से जुड़े सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह हथियार सिर्फ पारंपरिक युद्ध के लिए नहीं, बल्कि ‘असममित प्रतिरोध’ (asymmetric deterrence) के रूप में डिजाइन किया गया है — यानी रूस इस प्रणाली के जरिए पश्चिमी तटों पर हमला करने की क्षमता हासिल कर लेता है, जिसे रोक पाना लगभग असंभव होगा।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने इस लॉन्च को पूरी तरह रक्षात्मक रणनीति का हिस्सा बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “खाबरोवस्क और पोसाइडन जैसे हथियार रूस की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। हमारा उद्देश्य वैश्विक शांति को खतरे में डालना नहीं, बल्कि सुरक्षा संतुलन बनाए रखना है।”

अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पोसाइडन जैसी प्रणालियाँ भविष्य में समुद्री युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह हथियार कभी वास्तविक रूप से उपयोग में लाया गया, तो इसके परिणाम “मानव सभ्यता के लिए विनाशकारी” हो सकते हैं।

इस लॉन्च के साथ रूस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह परमाणु हथियारों की नई दौड़ में पीछे नहीं है। खाबरोवस्क पनडुब्बी के नौसेना में शामिल होने के बाद रूस की रणनीतिक परमाणु त्रिमूर्ति (land-sea-air deterrent) और भी सशक्त हो जाएगी।

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