पटना। बिहार में चुनावी सरगर्मियों के बीच सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने राज्य सरकार पर आचार संहिता के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है। पार्टी ने दावा किया है कि सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के नाम पर मतदाताओं को नकद सहायता और लाभ बांटे जा रहे हैं, जो चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को राज्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा। इसमें कहा गया कि “राज्य में आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकार प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। कई जिलों में सरकारी कर्मचारियों के माध्यम से लाभार्थियों को नकद राशि और अनुदान वितरित किए जा रहे हैं, जिससे मतदाताओं को प्रभावित किया जा सके।”
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर सरकारी योजनाओं का लाभ केवल सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों तक सीमित किया गया है। आरजेडी ने कहा कि यह न केवल आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी है। पार्टी ने मांग की है कि चुनाव आयोग तुरंत इस मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।
आरजेडी प्रवक्ता ने कहा, “चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्षता बनाए रखने की है। लेकिन जब सरकार खुद नियमों को तोड़कर मतदाताओं को प्रभावित कर रही हो, तो आयोग को कठोर कदम उठाने होंगे। लोकतंत्र में समान अवसर जरूरी है।”
दूसरी ओर, सरकार की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया गया है। एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि “सभी योजनाएं पूर्व स्वीकृत सरकारी कार्यक्रमों के तहत चलाई जा रही हैं। इनका चुनाव से कोई संबंध नहीं है। विपक्ष जनता का ध्यान भटकाने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहा है।”
चुनाव आयोग ने फिलहाल शिकायत पर संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब की है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, संबंधित जिलाधिकारियों से आचार संहिता पालन की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी मौसम में इस तरह की शिकायतें आम हो जाती हैं, लेकिन यदि आयोग को ठोस सबूत मिलते हैं तो यह मामला राज्य सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।





