एंटानानारिवो/काठमांडू। नेपाल में शुरू हुआ जेन-जेड आंदोलन अब अफ्रीका महाद्वीप तक फैल गया है। मेडागास्कर में युवा आंदोलनकारियों ने शनिवार को दावा किया कि राष्ट्रपति एंड्री राजाोलिनारिमाम्पियानिना ने देश की बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश छोड़कर भागने का निर्णय लिया है। हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय ने अभी तक इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेडागास्कर के कई बड़े शहरों में युवा और छात्र सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार और राजनीतिक गतिरोध को आंदोलन का मुख्य कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि युवा पीढ़ी अब परिवर्तन के लिए “सड़क और सोशल मीडिया दोनों मंचों” का उपयोग कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल में जेन-जेड आंदोलन ने युवा वर्ग में राजनीतिक चेतना और सामाजिक सक्रियता को बढ़ाया था। नेपाल की तरह ही मेडागास्कर में भी युवाओं ने सोशल मीडिया कैंपेन, पब्लिक रैलियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाया है।
आंदोलन के नेताओं का कहना है कि यह केवल राष्ट्रपति के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश में दीर्घकालीन भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अक्षमता के खिलाफ भी चेतावनी है। युवा प्रदर्शनकारी अब सत्ता में बैठी राजनीतिक पार्टियों और उनके गठबंधन पर सवाल उठा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो मेडागास्कर में राजनीतिक संकट गहरा सकता है, और इस प्रकार जेन-जेड आंदोलन का प्रभाव स्थायी रूप ले सकता है।
नेपाल में हुए आंदोलन की तरह, मेडागास्कर में भी जेन-जेड की मांगें स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे अफ्रीका में युवाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के रूप में देखा है।
हालांकि, राष्ट्रपति और उनके समर्थकों का कहना है कि दावे अतिरंजित हैं और स्थिति नियंत्रण में है। लेकिन लगातार बढ़ते प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो यह संकेत दे रहे हैं कि मेडागास्कर की राजनीति में आने वाले दिनों में हलचल बढ़ सकती है।





