न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए सांसद निशिकांत दुबे ने पाकिस्तान को कड़े शब्दों में आड़े हाथों लिया। उन्होंने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि वह भारत पर झूठे आरोप लगाने की बजाय “खुद को आईने में देखकर अपनी सच्चाई पहचानें”। दुबे ने आतंकवाद, मानवाधिकार उल्लंघन और धार्मिक कट्टरता के मुद्दों पर पाकिस्तान की दोहरी नीति को खुलकर बेनकाब किया।
‘दूसरों को उपदेश देने से पहले अपनी हालत सुधारें’
भारतीय प्रतिनिधि निशिकांत दुबे ने अपने संबोधन में कहा,
“पाकिस्तान को दूसरों को उपदेश देने की बजाय पहले खुद अपनी हालत सुधारनी चाहिए। जो देश अपने ही नागरिकों को आतंक के हवाले कर देता है, वह मानवाधिकार और लोकतंत्र की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रखता।”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठा प्रचार फैलाने की कोशिश करता है, लेकिन दुनिया अब उसकी “झूठी कहानियों” को भलीभांति समझ चुकी है।
निशिकांत दुबे ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान न केवल आतंकवाद को पनाह देता है, बल्कि उसे अपनी राजनीतिक नीति का हिस्सा बना चुका है। उन्होंने कहा,
“जब एक देश आतंकियों को नायक बताने लगे, तो वह वैश्विक शांति की बात नहीं कर सकता। भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है, जबकि पाकिस्तान उसे संरक्षण देता रहा है।”
भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज लोकतंत्र, विकास और वैश्विक सहयोग का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहता है, लेकिन यह तभी संभव है जब वे सीमा पार आतंकवाद का समर्थन बंद करें।
कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के बयान का जवाब देते हुए निशिकांत दुबे ने दो टूक कहा कि “जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, यह किसी अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय नहीं है।” उन्होंने पाकिस्तान से कहा कि वह इस तथ्य को स्वीकार करे और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे का दुरुपयोग बंद करे।
दुबे ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि आज विश्व समुदाय अच्छी तरह देख रहा है कि कौन-सा देश शांति, विकास और सहयोग का पक्षधर है, और कौन-सा देश हिंसा, चरमपंथ और झूठे प्रचार में विश्वास रखता है।
उन्होंने कहा,
“भारत को किसी प्रमाण की जरूरत नहीं, हमारे कर्म ही हमारी पहचान हैं। पाकिस्तान को भाषण देना बंद करना चाहिए और खुद को आईने में देखने की हिम्मत जुटानी चाहिए।”





