नई दिल्ली।
भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के प्रयासों के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल से नई दिल्ली में मुलाकात की। दोनों के बीच हुई इस अहम बैठक में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच एक नए व्यापार समझौते (Trade Pact) की संभावनाएं और प्रबल हो गई हैं।
बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं की प्रगति, बाजार पहुंच, निर्यात प्रोत्साहन और सेवा क्षेत्र में सहयोग जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों ने व्यापारिक संबंधों को “संतुलित और पारस्परिक लाभकारी” बनाने पर सहमति जताई।
सूत्रों के अनुसार, सर्जियो गोर ने भारत में अमेरिकी निवेश को बढ़ाने और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में संयुक्त साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की। वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दोनों देश उन्नत विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि बैठक में भारत द्वारा अमेरिका को किए जाने वाले कृषि और फार्मा निर्यात को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं। वहीं, अमेरिका ने भारत में ऊर्जा, रक्षा और अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई।
बीते कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच समग्र व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि कुछ नीतिगत मतभेदों के कारण यह वार्ता आगे नहीं बढ़ पा रही थी। अब राजदूत गोर और सचिव बर्थवाल की यह बैठक दोनों देशों के बीच “ट्रेड फ्रेमवर्क” को अंतिम रूप देने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
राजनयिक सूत्रों का कहना है कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होने की संभावना है, जिसमें व्यापार से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम सहमति बन सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा और विश्वास का प्रतीक है। सर्जियो गोर ने बैठक के बाद कहा कि “भारत हमारे लिए एक रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार है। हम चाहते हैं कि दोनों देश आपसी सहयोग से वैश्विक आर्थिक स्थिरता में योगदान दें।”
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 200 अरब डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि व्यापार समझौता जल्द अंतिम रूप ले लेता है, तो दोनों देशों के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी और सेवाओं के आदान-प्रदान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकती है।
अमेरिकी राजदूत और वाणिज्य सचिव की यह बैठक न केवल भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि दोनों देश आने वाले समय में व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के नए अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं।




