नई दिल्ली/काबुल। अफगानिस्तान में विदेशी सैन्य ढांचे और स्थायी सैन्य अड्डों की स्थापना के प्रयासों को लेकर भारत ने स्पष्ट रूप से विरोध जताया है। यह मुद्दा हाल ही में आयोजित एक बहुपक्षीय बैठक में सामने आया, जिसमें चीन, पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे।
बैठक का उद्देश्य और विषय
सूत्रों के अनुसार, बैठक का आयोजन अफगानिस्तान में स्थायी विदेशी सैन्य ढांचे के संभावित प्रभावों पर चर्चा करने के लिए किया गया। बैठक में सभी शामिल देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और अफगान जनता की संप्रभुता पर इस कदम के असर को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में यह स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान में किसी भी विदेशी सैन्य उपस्थिति को स्थापित करना क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरनाक होगा। भारत ने कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और अफगानिस्तान की संप्रभुता के उल्लंघन के समान हैं और इससे पूरे दक्षिण और मध्य एशिया में स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
चीन और पाकिस्तान की भूमिका
बैठक में भाग लेने वाले चीन और पाकिस्तान ने भी अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। चीन ने अफगानिस्तान में स्थायी सैन्य ढांचे के विस्तार पर चिंता जताई और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही। वहीं, पाकिस्तान ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के बढ़ते खतरे का हवाला देते हुए अपने मत प्रस्तुत किए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक क्षेत्रीय शक्तियों के बीच अफगानिस्तान के भविष्य और स्थिरता को लेकर सहमति बनाने की कोशिश थी। बैठक में सभी देशों ने यह भी माना कि अफगानिस्तान में स्थायी सैन्य अड्डों के विस्तार से स्थानीय सुरक्षा और शांति पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
भारत की प्राथमिकताएं
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने बैठक में यह दोहराया कि भारत की प्राथमिकता अफगानिस्तान में स्थिर, संप्रभु और आतंकवाद-रहित वातावरण सुनिश्चित करना है। भारत ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की आंतरिक समस्याओं को सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीतिक और विकासात्मक उपायों के जरिए हल किया जाना चाहिए।
क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, अफगानिस्तान में विदेशी सैन्य उपस्थिति का मामला केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा भी है। भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे प्रमुख देश इस क्षेत्रीय बैठक में शामिल होकर इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अफगानिस्तान में किसी भी प्रकार का सैन्य विस्तार शांतिपूर्ण ढंग से और सभी पक्षों की सहमति से ही होना चाहिए।
बैठक के अंत में सभी देशों ने सहमति व्यक्त की कि अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय शांति को बनाए रखना सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए, और किसी भी बाहरी सैन्य उपस्थिति को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों की चिंता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।




