Sunday, November 30, 2025

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न्यू स्टार्ट संधि पर ट्रंप ने जताई सहमति, रूस ने प्रस्ताव का स्वागत किया

वॉशिंगटन/मॉस्को। अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट संधि (New START Treaty) को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस संधि पर अपनी सहमति जताई है, जिसका स्वागत रूस ने भी किया है। न्यू स्टार्ट संधि दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु हथियारों की नियंत्रण समझौता है, जो दोनों देशों के बीच परमाणु क्षमता को सीमित और निगरानी में रखने का माध्यम है।
ट्रम्प की सहमति और बयान
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि वह न्यू स्टार्ट संधि का समर्थन करते हैं, क्योंकि यह अमेरिका और रूस दोनों की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि समझौता दोनों देशों के परमाणु हथियारों के भंडार को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाता है।
ट्रंप ने जोर देते हुए कहा, “मैं हमेशा चाहता था कि अमेरिका मजबूत रहे, लेकिन इसी के साथ वैश्विक परमाणु संतुलन और शांति बनाए रखना भी जरूरी है। न्यू स्टार्ट संधि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
रूस का स्वागत
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप की सहमति का स्वागत किया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि ट्रंप का समर्थन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है। मंत्रालय ने कहा कि यह पहल दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को मजबूत करने में मदद करेगी।
संधि की पृष्ठभूमि
न्यू स्टार्ट संधि की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी और यह अमेरिका और रूस के बीच लंबी दूरी के परमाणु हथियारों और उनके परीक्षणों पर निगरानी के लिए बनाई गई है। संधि के तहत दोनों देश अपने सक्रिय रणनीतिक हथियारों की संख्या को सीमित करते हैं और नियमित निरीक्षण के माध्यम से पारदर्शिता बनाए रखते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की सहमति और रूस की सकारात्मक प्रतिक्रिया वैश्विक परमाणु संतुलन और शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे संभावित सैन्य दौड़ को रोकने और रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
आगे की प्रक्रिया
अब अमेरिका और रूस के अधिकारियों के बीच विस्तृत बातचीत और तकनीकी मीटिंग्स शुरू होंगी, जिसमें संधि के नियमों के पालन, निगरानी प्रक्रियाओं और हथियारों की संख्या पर सहमति को अंतिम रूप दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था और परमाणु नियंत्रित क्षेत्रों में स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
इस घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के रणनीतिक संवाद और कूटनीतिक संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है, जो वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सकारात्मक संकेत है।

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