नई दिल्ली। रूस और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य सौदे ने भारत की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस समझौते को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति पर सीधे सवाल खड़े करते हुए कहा है कि सरकार की विदेश नीति की नाकामी के चलते भारत का परंपरागत सहयोगी रूस अब पाकिस्तान के साथ खड़ा दिख रहा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की स्थिति मजबूत दिखाने का दावा करती रही है, लेकिन वास्तविकता यह है कि रूस जैसे पुराने रणनीतिक साझेदार भी अब भारत की चिंताओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूस-पाकिस्तान की नजदीकी भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक हितों के लिए गंभीर चुनौती है।
इधर, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। भाजपा नेताओं का कहना है कि मोदी सरकार की विदेश नीति संतुलित और व्यावहारिक है। रूस सहित अन्य देशों के साथ भारत के संबंध पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुए हैं। पाकिस्तान और रूस के बीच किसी समझौते का मतलब यह नहीं है कि भारत के हितों को नुकसान होगा।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की यह पहल वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा है। यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर पश्चिमी देशों का दबाव बढ़ा है, ऐसे में वह एशियाई देशों के साथ नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि भारत और रूस के दशकों पुराने रिश्ते अभी भी गहरे हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में सहयोग जारी है।
फिलहाल, विपक्ष इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों पर बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आगामी सत्र में यह मामला सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।





