उत्तरकाशी। चारधाम यात्रा के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल माता यमुनोत्री धाम के कपाट इस वर्ष भाई दूज (31 अक्टूबर) के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। परंपरा के अनुसार कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की डोली अपने शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव स्थित मंदिर में विराजमान होगी, जहां श्रद्धालु अगले छह माह तक दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने शुक्रवार को यह घोषणा की। समिति के अधिकारियों के अनुसार, भाई दूज के दिन प्रातःकाल विशेष पूजन-अर्चन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यमुनोत्री धाम के कपाट विधिविधान से बंद किए जाएंगे। इसके बाद गंगा-यमुना के संगम स्थल पर पारंपरिक शोभायात्रा के साथ माता यमुना की डोली खरसाली के लिए प्रस्थान करेगी।
ध्यान रहे कि इसी के साथ चारधाम यात्रा के एक और पड़ाव का समापन होगा। शीतकालीन अवधि में धाम की ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिसके कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही असंभव हो जाती है। इसलिए परंपरा के तहत कपाट हर साल दीपावली और भाई दूज के बीच बंद किए जाते हैं।
मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि कपाट बंद होने से पूर्व अधिक से अधिक संख्या में धाम पहुंचकर माता यमुना के दर्शन का लाभ लें। इस वर्ष चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड संख्या में यात्रियों ने यमुनोत्री धाम के दर्शन किए, जिससे स्थानीय व्यापार और तीर्थ पर्यटन को नई ऊर्जा मिली।
कपाट बंद होने के बाद अगले छह माह तक खरसाली गांव स्थित शीतकालीन गद्दी स्थल पर पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से संपन्न होंगे।





