Sunday, November 30, 2025

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उत्तराखंड: आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने की तैयारी, 500 करोड़ का प्रस्ताव विश्व बैंक को भेजेगा विभाग

देहरादून।
इस वर्ष मानसून के दौरान उत्तराखंड को प्राकृतिक आपदाओं ने गहरे घाव दिए हैं। अतिवृष्टि और भूस्खलन जैसी घटनाओं में 136 लोगों की मौत हुई, जबकि 149 लोग घायल हुए। छह हजार से अधिक मकान आंशिक या पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए और सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा। इन हालातों ने राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।
आपदा प्रबंधन विभाग अब संसाधनों को बढ़ाने और सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए व्यापक योजना तैयार कर रहा है। इसके तहत विश्व बैंक की यू-प्रिपेयर योजना के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये का एक विशेष प्रोजेक्ट भेजने की तैयारी है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के माध्यम से विश्व बैंक तक पहुंचाया जाएगा।
क्या-क्या होंगे प्रोजेक्ट के तहत काम
विभागीय सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार इस प्रोजेक्ट में आपदा प्रबंधन के कई अहम पहलुओं पर काम किया जाएगा।
• जिला स्तर पर पहले से मौजूद कंट्रोल रूम को और अधिक आधुनिक व सक्षम बनाया जाएगा।
• तहसील स्तर पर नए कंट्रोल रूम की स्थापना की जाएगी।
• रेस्क्यू व्हीकल खरीदे जाएंगे ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई हो सके।
• आपदा के समय सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के लिए शेल्टर होम बनाए जाएंगे।
• बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए प्री-फैब्रिकेटेड स्कूल भवनों का निर्माण किया जाएगा।
रिस्पांस टाइम घटाना बड़ी चुनौती
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपदा में “रिस्पांस टाइम” यानी प्रतिक्रिया देने का समय सबसे अहम होता है। पहले किसी घटना के बाद औसतन 22 मिनट का रिस्पांस टाइम लगता था, जिसे अब घटाकर लगभग 12 मिनट तक लाया गया है। विभाग का प्रयास है कि आने वाले समय में इसे और कम किया जा सके, ताकि जान-माल की हानि न्यूनतम हो।
यू-प्रिपेयर योजना से जुड़े प्रावधान
गौरतलब है कि वर्तमान में उत्तराखंड में विश्व बैंक की 1,480 करोड़ रुपये से अधिक की यू-प्रिपेयर योजना चल रही है। यह पांच साल की अवधि का प्रोजेक्ट है, जिसके तहत आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। अब इसी योजना के कंटिजेंसी इमरजेंसी रिस्पांस कंपोनेंट (CERC) के तहत अतिरिक्त 500 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
सरकार का फोकस पुनर्निर्माण और रोकथाम पर
आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के कामों के साथ-साथ सरकार अब भविष्य में ऐसी स्थितियों से बेहतर ढंग से निपटने पर भी जोर दे रही है। शासन स्तर पर हाल ही में हुई बैठकों में इस पर गंभीर चर्चा की गई। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते उठाए गए कदम राज्य की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को नई दिशा देंगे और पहाड़ी राज्य को बार-बार आने वाली प्राकृतिक चुनौतियों से लड़ने में मजबूती प्रदान करेंगे।

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