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आतंकवाद विकास के लिए खतरा, शांति के लिए बातचीत जरूरी: जयशंकर का विश्व समुदाय को संदेश

संयुक्त राष्ट्र, न्यूयॉर्क:
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को वैश्विक मंच से दुनिया को चेतावनी दी कि आतंकवाद केवल सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि वैश्विक विकास के लिए भी लगातार खतरा बनकर उभर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकी गतिविधियों के प्रति न तो सहिष्णुता दिखानी चाहिए और न ही उन्हें किसी तरह का समर्थन देना चाहिए।

दोहरे मानदंडों की निंदा

जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने यह भी कहा कि जो देश और संगठन आतंकियों के खिलाफ ठोस कदम उठाते हैं, वे वैश्विक सुरक्षा और शांति के लिए बड़ी सेवा करते हैं। उन्होंने किसी एक देश का नाम लिए बिना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानदंडों की कड़ी निंदा की।

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय शांति और वैश्विक विकास दोनों में गिरावट आई है। उनका कहना था, “शांति विकास के लिए आधार है, लेकिन विकास को खतरे में डालकर शांति संभव नहीं।” उन्होंने ऊर्जा और अन्य जरूरी संसाधनों में अनिश्चितता पैदा करने वाले कदमों पर भी चेतावनी दी, कहा कि इससे किसी को लाभ नहीं होगा। उनका मानना है कि समाधान संवाद और कूटनीति में ही है, न कि समस्याओं को और जटिल बनाने में।

ग्लोबल वर्कफोर्स की जरूरत

जयशंकर ने आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैश्विक कामगारों की बढ़ती आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई देशों में राष्ट्रीय जनसांख्यिकी कारणों से कार्यबल की मांग पूरी नहीं हो पाती, और इसका असर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है।

विदेश मंत्री ने विशेष रूप से एच-1बी वीजा और अमेरिका द्वारा लगाए गए नए 1,00,000 डॉलर शुल्क का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कदम से मुख्य रूप से भारतीय पेशेवर प्रभावित होंगे, क्योंकि अधिकांश लाभार्थी भारतीय हैं।

आपूर्ति श्रृंखलाओं और बाजार तक पहुंच पर चिंता

जयशंकर ने यह भी कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में दुनिया आपूर्ति श्रृंखलाओं और उत्पादन स्रोतों को लेकर सतर्क रही है। अब बाजार तक पहुंच की अनिश्चितता से खुद को बचाना जरूरी है। उनका मानना है कि केवल सुरक्षा उपाय और आर्थिक कदम ही नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग, संवाद और रणनीतिक साझेदारी भी आज के समय की अहम जरूरत हैं।

जयशंकर का यह संदेश स्पष्ट रूप से वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं को आतंकवाद, विकास और रोजगार सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया।

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