नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। गाजा में इस्राइली सेना के हमले जारी हैं और भारी तबाही के बीच जान-माल के नुकसान से चिंतित कई इस्लामी देशों ने अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात का निर्णय लिया है। इस मुलाकात का आयोजन संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र से अलग किया गया है।
मुलाकात में शामिल देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जॉर्डन, तुर्की, इंडोनेशिया और पाकिस्तान शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस दौरान ट्रंप इन नेताओं और अधिकारियों को गाजा में युद्ध समाप्त करने के अमेरिका के तीन सूत्रीय प्रस्ताव के बारे में जानकारी देंगे।
ट्रंप का तीन सूत्रीय प्लान
रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप की योजना में तीन मुख्य बिंदु शामिल हैं:
1. बंधकों की रिहाई – युद्ध के दौरान कब्जे में लिए गए बंधकों को मुक्त कराना।
2. गाजा से इस्राइली सेना की वापसी – इस्राइल को पीछे हटाने पर बातचीत और दबाव।
3. गाजा में युद्ध के बाद शासन – ऐसी व्यवस्था बनाना जिसमें हमास का कोई राजनीतिक या प्रशासनिक नियंत्रण न हो।
ट्रंप चाहते हैं कि अरब और इस्लामी देश गाजा में शांति सेना के लिए सैनिक भेजने के लिए तैयार हों, जिससे इस्राइल पर दबाव बढ़े और गाजा में पुनर्निर्माण और बसावट का काम शुरू हो सके। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पहले ही सोमवार को कहा कि उनका देश गाजा में शांति सेना भेजने के लिए तैयार है।
वित्तीय और प्रशासनिक पहल
इस योजना में यह भी शामिल है कि अरब और मुस्लिम देशों की आर्थिक मदद गाजा के पुनर्निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था के लिए दी जाए। ट्रंप चाहते हैं कि गाजा में एक अलग इलाका (एनक्लेव) बनाया जाए और वहां स्थायी शांति सुनिश्चित हो।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और हालात
• फ्रांस, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों ने द्वि-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है।
• इसके बावजूद गाजा में जारी हमास-इस्राइल संघर्ष और नागरिक जनहानि के चलते अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ी है।
• इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगातार अपनी रणनीति के अनुसार गाजा पर दबाव बनाए हुए हैं।
मुलाकात का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तीन सूत्रीय प्रस्ताव पर अरब और मुस्लिम देशों से समर्थन प्राप्त हो और गाजा संकट को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त किया जा सके।





