Sunday, November 30, 2025

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सरकार की कड़ी कार्रवाई से घबराए नक्सली, बोले – शांति वार्ता के लिए हथियार छोड़ने को तैयार

नई दिल्ली। लगातार हो रही सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई और संगठन को हुए बड़े नुकसानों के बाद नक्सलियों ने पहली बार नरमी के संकेत दिए हैं। माओवादी संगठन की ओर से प्रवक्ता अभय ने 15 अगस्त को एक विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया है कि संगठन अब सरकार के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है और इसके लिए हथियार छोड़ने पर भी विचार कर रहा है।

विज्ञप्ति में माओवादियों ने केंद्र सरकार से एक महीने का औपचारिक संघर्षविराम (सीजफायर) घोषित करने की मांग की है। साथ ही, इस अवधि में चल रहे तलाशी अभियानों और सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाइयों को रोकने की अपील की गई है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाती है तो वे गृह मंत्री या उनके द्वारा नियुक्त प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने को तैयार हैं।

संगठन के भीतर मशविरे के लिए मांगा समय

माओवादियों ने कहा है कि शांति वार्ता की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने से पहले उन्हें एक महीने का समय चाहिए ताकि संगठन के भीतर और जेल में बंद अपने साथियों से विस्तृत सलाह-मशविरा किया जा सके। यह अवधि उन्हें अपनी आंतरिक रणनीति तय करने और आगे के रास्ते पर सामूहिक सहमति बनाने में मदद करेगी।

हालिया घटनाओं से डगमगाया संगठन

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि हाल के दिनों में नक्सलियों को लगातार करारी चोट पहुंची है। पिछले एक माह के भीतर संगठन को तीन बड़े झटके लगे हैं—

  • छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में बड़े माओवादी नेता बालकृष्ण का मारा जाना,
  • झारखंड में सहदेव का ढेर होना,
  • और सुझाता जैसी सक्रिय महिला कमांडर का आत्मसमर्पण।

इन घटनाओं ने नक्सल संगठन की रीढ़ कमजोर कर दी है और नेतृत्व पर दबाव बढ़ा दिया है। यही वजह है कि संगठन अब खुले तौर पर वार्ता की इच्छा जता रहा है।

सरकार की रणनीति असरदार

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त रणनीति और सुरक्षा बलों की लगातार दबावपूर्ण कार्रवाई के चलते नक्सली अब रक्षात्मक मुद्रा में आ गए हैं। लंबे समय से माओवादियों को खात्मे की दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है कि पहली बार उन्होंने आधिकारिक रूप से संघर्ष विराम और बातचीत की बात स्वीकार की है।

आगे की राह

हालांकि, यह देखना होगा कि सरकार माओवादियों की इस पहल पर क्या रुख अपनाती है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि माओवादियों के इस बयान को सिर्फ रणनीतिक चाल के रूप में भी देखा जा सकता है, ताकि संगठन को regroup होने और नए सिरे से ताकत जुटाने का समय मिल सके।

फिलहाल, नक्सली नेतृत्व का यह बयान एक बड़े बदलाव का संकेत है और आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह वास्तव में शांति प्रक्रिया की शुरुआत है या केवल एक रणनीतिक विराम

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