नई दिल्ली। गुप्त सूचना और खुफिया संकेतों के आधार पर केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत में अपने नेटवर्क (मॉड्यूल) फिर से सक्रिय कर दिए हैं और इन मॉड्यूलों के माध्यम से दूर-दराज के इलाकों में छोटे-छोटे औद्योगिक गोठ या कुटीर इकाइयों के रूप में हथियार और गोला-बारूद बनाने की योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इन इकाइयों को कामयाब होने पर आतंकवादियों तक हथियारों की तेज और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे सुरक्षा चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार, विशेषकर बंगाल के बर्धमान मॉड्यूल जैसी रणनीति को दुहराने का प्रयास किया जा रहा है। याद रहे कि बर्धमान मॉड्यूल का 2014 में खुलासा हुआ था, जब पटाखा-निर्माण जैसी दिखने वाली कई कुटीर इकाइयों में बड़े पैमाने पर बम बनाए जाने का पता चला था। उस बार भंडाफोड़ के बाद हजारों बम बरामद हुए थे और कई संदिग्धों पर कार्रवाई हुई थी।
केंद्रीय खुफिया विभागों — विशेष रूप से इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) — को मिली ताज़ा जानकारी में कहा गया है कि देशभर में छोटे-छोटे हथियार-निर्माण यूनिट स्थापित करने की योजना तैयार की जा रही है। इन इकाइयों का स्वरूप ऐसा रखा जा सकता है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस का ध्यान आकर्षित न हो; उदाहरण के लिए पटाखा, खाद्य-पॅकेजिंग या कुटीर उद्योग का पर्दा डालकर गोला-बारूद बनाया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य स्तरीय पुलिस इकाइयों को चेतावनी देते हुए केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर त्वरित और समन्वित कार्रवाई की सलाह दी है। अगर मॉड्यूलों पर कड़ी नजर न रखी गई तो रातों-रात अनेक छोटी-छोटी इकाइयाँ स्थापित हो सकती हैं और उनमें भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री का उत्पादन संभव है — जिससे शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।
खुफिया सूचनाओं के अनुसार, इन इकाइयों के लिए वित्तीय मदद गुप्त तरीकों से भेजी जा रही है। आईएसआई अपने नेटवर्क के माध्यम से हवाला और अन्य माध्यमों से धनराशि पहुँचाती है और इन धन-स्रोतों में खाड़ी देशों से भेजा गया पैसा भी शामिल बताया जा रहा है। ऐसे वित्तपोषण के चलते मॉड्यूलों का संचालन और विस्तारण सहज होगा।
सुरक्षा एजेंसियों ने बर्धमान मॉड्यूल के भंडाफोड़ के अनुभव को आधार बनाकर स्थानीय प्रशासनों को निम्न कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
- ग्रामीण व कुटीर उद्योगों की पैटर्न-आधारित निगरानी और संदिग्ध इकाइयों का फील्ड सत्यापन;
- पटाखा/खाद्य/छोटी निर्माण इकाइयों के कच्चे माल और आउटपुट का विसंगति-आधारित ऑडिट;
- संदिग्ध धन के ट्रांजैक्शनों की त्वरित रिपोर्टिंग हेतु बैंकिंग और वित्तीय अनियमितताओं पर नजर;
- विभिन्न एजेंसियों (राज्य पुलिस, IB, NIA, गृह विभाग) के बीच सूचना-साझाकरण और तात्कालिक प्रतिक्रिया टीमों का गठन।
न्यायिक और पुलिस सूत्रों का मानना है कि यदि ऐसी किश्तों में हथियार-निर्माण का जाल फैलता है तो इसे तोड़ने में समय और बड़े पैमाने पर संसाधन लगेंगे। इसलिए शुरुआती दौर में सतर्कता और सटीक कार्रवाई अत्यंत जरूरी है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि समुदाय-आधारित जागरूकता और स्थानीय लोगों की रिपोर्टिंग से भी ऐसे मॉड्यूल पकड़े जा सकते हैं, क्योंकि अक्सर पड़ोसी या श्रमिक असामान्य गतिविधियों पर पहले नजर डालते हैं।
सरकारी स्तर पर फिलहाल आधिकारिक बयान सीमित हैं, पर एजेंसियाँ सक्रिय दृष्टि से जांच-पड़ताल और संदिग्ध ठिकानों की तलाशी कर रही हैं। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय इकाइयों के संयुक्त छापों की रिपोर्ट और यदि उपलब्ध हों तो बरामद सामग्री पर आधारित विस्तृत जानकारी आने पर प्रकाशित की जाएगी।
निष्कर्ष: सुरक्षा परख अब उच्च सतर्कता पर है — आईएसआई के कथित सक्रिय मॉड्यूलों और गुप्त वित्तपोषण की आशंका ने केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर निगरानी और समन्वय को अनिवार्य बना दिया है। बर्धमान मॉड्यूल के भंडाफोड़ का इतिहास दिखाता है कि ऐसे नेटवर्क कितने छिपे और सक्षम हो सकते हैं; इसलिए अब समय रहते रोकथाम और पहचान के उपाय तीव्र करना आवश्यक है।





