Sunday, November 30, 2025

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आपदा का असर: केवल केदारनाथ–बदरीनाथ पर टिकी चारधाम यात्रा, भूस्खलन बना सबसे बड़ी चुनौती

उत्तराखंड में इस वर्ष मानसून ने चारधाम यात्रा को गहरी चोट पहुँचाई है। उत्तरकाशी जिले में आई आपदा और लगातार हो रहे भूस्खलनों के कारण गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा पूरी तरह से ठप हो गई है। इस वजह से इस समय चारधाम यात्रा केवल केदारनाथ और बदरीनाथ धाम तक ही सीमित रह गई है।

गंगोत्री–यमुनोत्री में सन्नाटा

आमतौर पर मानसून के दौरान यात्रियों की संख्या में कुछ गिरावट आती है, लेकिन सितंबर से फिर से रौनक लौट आती है। इस बार स्थिति अलग है। आपदा से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पूरी तरह बंद हैं। जहाँ इन पवित्र धामों में सामान्य दिनों में जयकारों की गूंज रहती है, वहीं आजकल वहाँ सन्नाटा पसरा है।

अब तक 42.54 लाख तीर्थयात्री पहुँचे धामों तक

पर्यटन विभाग के आँकड़ों के अनुसार 30 अप्रैल से यात्रा शुरू होने के बाद अब तक 42.54 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम में दर्शन कर चुके हैं।

  • केदारनाथ: 80 लाख
  • बदरीनाथ: 78 लाख
  • गंगोत्री: 69 लाख
  • यमुनोत्री: 86 लाख
  • हेमकुंड साहिब: 49 लाख

फिलहाल, गंगोत्री और यमुनोत्री मार्ग बंद होने से भक्तों की आस्था का केंद्र केवल केदारनाथ और बदरीनाथ धाम रह गए हैं। इन दोनों धामों में प्रतिदिन तीन से पाँच हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं।

भूस्खलन सबसे बड़ी बाधा

केदारनाथ और बदरीनाथ धाम की यात्रा भी आसान नहीं रह गई है।

  • बदरीनाथ मार्ग पर लामबगड़ और कमेड़ा क्षेत्र में भूस्खलन लगातार परेशानी खड़ी कर रहा है।
  • वहीं सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच का हिस्सा केदारनाथ यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इन बाधाओं के कारण कई बार श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और कभी-कभी यात्रा बीच में रोकनी पड़ती है।

सरकार ने जताई चिंता और दिए निर्देश

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने स्वीकार किया कि आपदा और बारिश की वजह से यात्रा की गति थमी हुई है। उन्होंने कहा, मौसम बदलने के बाद यात्रा फिर से गति पकड़ेगी। इस समय भूस्खलन की संभावना अधिक है, इसलिए श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे मौसम की पूरी जानकारी लेकर ही यात्रा पर निकलें।”

श्रद्धालुओं की उम्मीद बरकरार

कठिनाइयों के बावजूद, श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। आस्था से भरे लोग अब भी केदारनाथ और बदरीनाथ धाम पहुँच रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार मार्गों को सुचारू बनाने में जुटा है।

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