वॉशिंगटन – अमेरिका में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के विविधता, समानता और समावेशन (DEI) कार्यक्रमों को समाप्त करने के ट्रंप प्रशासन के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। मैरीलैंड की यूएस डिस्ट्रिक्ट जज स्टेफनी गैलाघर ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए इन निर्देशों को ग़ैरक़ानूनी करार दिया।
जज ने कहा कि शिक्षा विभाग ने कानून का उल्लंघन किया, जब उसने संस्थानों को चेतावनी दी कि यदि वे DEI पहल जारी रखते हैं, तो उनका संघीय फंड काट दिया जाएगा। यह गाइडलाइन अप्रैल से ही आंशिक रूप से निलंबित थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह याचिका फरवरी में अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स और अमेरिकन सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन ने दायर की थी। इसमें सरकार के दो मेमो को चुनौती दी गई थी, जिनमें कहा गया था कि जातीय आधार पर लिए जाने वाले फैसले बंद किए जाएं, अन्यथा संस्थान फंडिंग से वंचित हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन ने इसे श्वेत और एशियाई-अमेरिकी छात्रों के खिलाफ भेदभाव समाप्त करने के नाम पर पेश किया था।
जज की टिप्पणी
गैलाघर ने अपने फैसले में कहा—
“ये मेमो सिर्फ जानकारी देने के लिए नहीं थे, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत कर रहे थे। इससे लाखों शिक्षकों में डर था कि उनके वैध और लाभकारी कार्यक्रम भी सजा का कारण बन सकते हैं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फैसला नीतियों की अच्छाई या बुराई पर नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन पर आधारित है।
कानूनी और राजनीतिक संदर्भ
शिक्षा विभाग ने इन मेमो के जरिए सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले की व्याख्या को आगे बढ़ाया था, जिसमें कॉलेज एडमिशन में जातीय विचार (Race-based consideration) को प्रतिबंधित किया गया था। सरकार का कहना था कि यह पाबंदी एडमिशन से आगे बढ़कर फाइनेंशियल एड, हायरिंग और स्टूडेंट लाइफ पर भी लागू होनी चाहिए।
अप्रैल के दूसरे मेमो में राज्यों से यह प्रमाणपत्र मांगा गया था कि वे “अवैध DEI प्रैक्टिस” नहीं अपना रहे, अन्यथा फंड रोकने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।





