Saturday, February 21, 2026

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रेलवे का आम आदमी पर फोकस: पांच वर्षों में 70% बढ़े नॉन-एसी डिब्बे, ‘कवच’ से बढ़ी सुरक्षा

आम जनता को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने बीते पांच वर्षों में ट्रेनों में गैर-वातानुकूलित (नॉन-एसी) डिब्बों की संख्या में 70% की बढ़ोतरी की है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को संसद में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले पांच वर्षों में 17,000 अतिरिक्त सामान्य व शयनयान डिब्बों के निर्माण के लिए एक विशेष विनिर्माण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।

रेल मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में ही विभिन्न लंबी दूरी की ट्रेनों में 1,250 सामान्य डिब्बे लगाए गए हैं। रेलवे मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों में किफायती किरायों के साथ बड़ी संख्या में सेवाएं प्रदान कर रहा है, जिससे गरीब और निम्न मध्यम वर्ग को राहत मिल रही है।

अमृत भारत ट्रेनों का उत्पादन तेज
रेल मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे ने अमृत भारत ट्रेनों और नमो भारत रैपिड रेल सेवाओं की शुरुआत की है, जो विशेष रूप से निम्न आय वर्ग के यात्रियों को बेहतर गुणवत्ता वाली सेवाएं प्रदान करती हैं। इसके अलावा, 100 अतिरिक्त अमृत भारत ट्रेनों के उत्पादन की योजना भी बनाई गई है।

उन्होंने बताया कि सामान्य डिब्बों की बढ़ती उपलब्धता के चलते अनारक्षित डिब्बों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है —

  • 2022-23: 553 करोड़
  • 2023-24: 609 करोड़
  • 2024-25 (आकलन): 651 करोड़ यात्री

मथुरा-कोटा सेक्शन पर शुरू हुआ ‘कवच-4.0′
रेलवे ने दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग के अत्यंत व्यस्त मथुरा-कोटा सेक्शन पर कवच-4.0′ सुरक्षा प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक है, जिसे भारतीय इंजीनियरों ने डिज़ाइन और विकसित किया है।

वैष्णव ने बताया कि अगले छह वर्षों में देश के सभी प्रमुख रेल मार्गों पर कवच प्रणाली को लागू कर दिया जाएगा। इस प्रणाली के जरिए लोको पायलट को अब कोहरे या कम दृश्यता में ट्रेन चलाने के दौरान बाहर देखने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी।

मथुरा-कोटा सेक्शन पर प्रतिदिन 160 से अधिक मेल-एक्सप्रेस और 110 मालगाड़ियां चलती हैं। ऐसे में यह सुरक्षा प्रणाली रेलवे के लिए तकनीकी और परिचालन दोनों ही दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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