सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं (AFMS) अब दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में ड्रोन के जरिये खून की थैलियां, दवाइयां और चिकित्सा उपकरण पहुंचाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस पहल की जानकारी शनिवार को सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने पुणे स्थित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (AFMC) में पांच मेडिकल कैडेटों के कमीशनिंग समारोह में दी।
चिकित्सा निकासी भी ड्रोन से संभव बनाने की सोच
वाइस एडमिरल सरीन ने कहा कि AFMS टेलीमेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पॉइंट-ऑफ-केयर उपकरण और ड्रोन तकनीक को तेजी से अपना रहा है। उन्होंने कहा,
“हम खून की थैलियों, दवाओं और अन्य चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति के लिए ड्रोन का उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं। भविष्य में हम ऐसी तकनीक की उम्मीद करते हैं, जिससे मेडिकल निकासी (Evacuation) भी ड्रोन के जरिए हो सके।”
पायलट प्रोजेक्ट पर मंथन
AFMS वर्तमान में एक पायलट परियोजना की योजना पर काम कर रहा है, जो ऐसे क्षेत्रों में लागू की जा सके जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल होता है। सरीन ने कहा कि यह तकनीक निजी और नागरिक संस्थाओं द्वारा पहले से उपयोग में लाई जा रही है, और अब सैन्य चिकित्सा क्षेत्र में इसके एकीकरण पर ध्यान दिया जा रहा है।
रोकथाम से उपचार तक तकनीकी प्रगति
AFMC के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल पंकज राव ने कहा कि चिकित्सा सेवा प्रणाली में अब रोकथाम से लेकर उपचार तक तकनीकी प्रगति को तेजी से अपनाया जा रहा है, जिससे सेवाएं अधिक प्रभावशाली और सुलभ बन रही हैं।
अंतरिक्ष मिशन में भी AFMS की भूमिका
वाइस एडमिरल सरीन ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए भेजे गए एक्सिओम-4 मिशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मिशन के सभी चार अंतरिक्ष यात्रियों, जिनमें भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं, की सेहत की जिम्मेदारी AFMS के पास है।
“अमेरिका में विमानन चिकित्सा संस्थान प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है, और ह्यूस्टन, टेक्सास में एक भारतीय ग्रुप कैप्टन को क्रू की निगरानी के लिए तैनात किया गया है।”
निष्कर्ष
AFMS की यह पहल न सिर्फ सैन्य क्षेत्रों में, बल्कि आपदा प्रबंधन, सीमावर्ती गांवों और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्रांति ला सकती है। अगर ड्रोन तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो यह भारत की सैन्य और नागरिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक बड़ा कदम साबित होगा।





