अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आयात शुल्क (इंपोर्ट टैरिफ) की वजह से जापान की सबसे बड़ी कार कंपनियां टोयोटा, निसान और होंडा को करीब 19 अरब डॉलर से ज्यादा का झटका लगने वाला है। ट्रंप की इस नीति ने पूरी दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया है।
इन प्रमुख कंपनियों ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि इस साल उनकी वित्तीय स्थिति कमजोर हो सकती है। कुछ कंपनियां तो हालात की अनिश्चितता के चलते वित्तीय अनुमान (गाइडेंस) तक जारी करने से बच रही हैं। ये अस्थिरता कंपनियों को उत्तर अमेरिका में निवेश और उत्पादन के तरीके पर दोबारा सोचने को मजबूर कर रही है।
दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी टोयोटा को इस टैरिफ नीति से सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। कंपनी ने बताया कि सिर्फ अप्रैल और मई में ही उन्हें ऑपरेटिंग इनकम में 1.2 अरब डॉलर (करीब 180 अरब येन) का नुकसान हो सकता है। पूरे वित्तीय साल में यह नुकसान 10.7 अरब डॉलर तक जा सकता है, ऐसा ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस का अनुमान है। वहीं, एक विश्लेषक जूली बूटे का मानना है कि यह नुकसान 5.4 से 6.8 अरब डॉलर के बीच रह सकता है।
होंडा और निसान, दोनों ने लगभग 3 अरब डॉलर के नुकसान की आशंका जताई है। सुबारू, जो अमेरिका में बिकने वाली अपनी आधी गाड़ियां वहीं इम्पोर्ट करती है, उसने भी 2.5 अरब डॉलर के घाटे की भविष्यवाणी करते हुए साल भर की गाइडेंस देना टाल दिया। माजदा ने भी पूरे साल का अनुमान जारी नहीं किया।
अमेरिका में 3 अप्रैल से ज्यादातर इम्पोर्टेड गाड़ियों पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया, और 3 मई से ऑटो पार्ट्स पर भी यही टैरिफ लागू हो गया। हालांकि कुछ कार्यकारी आदेशों के तहत डबल टैरिफ से राहत दी गई है, फिर भी इससे कारों की कीमत हजारों डॉलर तक बढ़ जाएगी।
जापान की टॉप कार कंपनियों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। ये कंपनियां अक्सर मैक्सिको और कनाडा में गाड़ियां बनाकर अमेरिका भेजती हैं। लेकिन अब ट्रंप की टैरिफ नीति के चलते ये तरीका महंगा और शायद अव्यवहारिक बनता जा रहा है। कंपनियां अब इस उलझन में हैं कि सप्लाई चेन को कैसे बदला जाए ताकि टैरिफ से बचा जा सके।
जापानी कार निर्माता अब उम्मीद कर रहे हैं कि व्यापार वार्ता से उन्हें राहत मिलेगी। क्योंकि इस महीने के आखिर में अमेरिका के साथ बातचीत में तेजी आने की संभावना है। प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने अर्थव्यवस्था के लिए इस क्षेत्र के महत्व को देखते हुए, ऑटो टैरिफ का समाधान न करने वाले किसी भी सौदे को स्वीकार न करने की कसम खाई है।
होंडा ने हाल ही में एलान किया कि वह कनाडा में इलेक्ट्रिक व्हीकल सप्लाई चेन के लिए 11 अरब डॉलर की निवेश योजना को दो साल के लिए टाल रही है। इसमें एक ऐसा प्लांट भी शामिल था जो हर साल 2.4 लाख गाड़ियां बना सकता था। इसके साथ ही, होंडा अपने सिविक हाइब्रिड मॉडल का उत्पादन जापान से अमेरिका शिफ्ट कर रही है। 2024 में अमेरिका में बिकने वाली उसकी लगभग 40 प्रतिशत गाड़ियां आयात की गई थीं।
वहीं, सुबारू ने कहा है कि वह अपनी सभी निवेश योजनाओं की समीक्षा कर रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक गाड़ियों का डेवलपमेंट भी शामिल है। निसान ने मैक्सिको में बनी एसयूवी गाड़ियों की अमेरिका में बुकिंग बंद कर दी है। और माजदा ने कनाडा को भेजी जाने वाली एक मॉडल की सप्लाई रोक दी है, जिसे अलबामा के प्लांट में बनाया जाता है।
टोयोटा फिलहाल शॉर्ट टर्म में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही है। उसने अभी तक उत्पादन को शिफ्ट नहीं किया है। और उसके सीईओ कोजी साटो ने कहा कि कंपनी मीडियम से लॉन्ग टर्म में अमेरिका में अपने उत्पादन को बढ़ाने पर विचार कर रही है।
निसान पहले से ही पिछले 25 साल के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है। कंपनी ने 20,000 नौकरियां कम करने और 7 उत्पादन इकाइयों को बंद करने की घोषणा कर रखी है। इस सबके बावजूद, उसे आर्थिक मदद की सख्त जरूरत है, खासकर तब से जब इस साल की शुरुआत में होंडा के साथ विलय की बातचीत नाकाम हो गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के सीनियर ऑटो एनालिस्ट तत्सुओ योशिदा का कहना है, “अगर निसान ने पहले ही ये कदम उठाए होते, तो उसकी हालत इतनी खराब न होती। अभी जो कदम उठाए जा रहे हैं, उनका असर कितना होगा ये कहना मुश्किल है।”





