Monday, February 16, 2026

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पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सैन्य विघटन शुरू

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर डिसइंगेजमेंट यानी सैन्य विघटन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देपसांग और डेमचॉक में स्थानीय कमांडर स्तर की मीटिंग 22 अक्तूबर से शुरू हुई। इस मीटिंग के बाद डेमचॉक में दोनों तरफ से एक-एक टेंट हटाया गया और गुरुवार को कुछ अस्थायी संरचनाओं को भी तोड़ा गया। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्ती को लेकर बीते दिनों एक अहम समझौता हुआ। विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने सीमा पर तनाव घटाने की दिशा में इसे बड़ी पहल बताया।डेमचॉक में भारतीय सैनिक चार्डिंग नाले के पश्चिम की तरफ पीछे की ओर जा रहे हैं और चीनी सैनिक (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) नाले के दूसरी तरफ यानी पूरब की तरफ वापस जा रहे हैं। दोनों तरफ से करीब 10-12 अस्थायी संरचना यानी टेंपरेरी स्ट्रक्चर बने हैं और दोनों तरफ से करीब 12-12 टेंट लगे हैं, जो हटने हैं। देपसांग में चीनी सेना के टेंट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने गाड़ियों के बीच में तिरपाल लगाकर टेंपरेरी शेल्टर बनाए हैं। गुरुवार को यहां से भी चीनी सैनिकों ने अपनी कुछ गाड़ियां कम की हैं। भारतीय सेना ने भी कुछ सैनिकों की संख्या गुरुवार को यहां से कम की। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद देपसांग और डेमचॉक में अगले 4-5 दिनों में पेट्रोलिंग शुरू होने की उम्मीद है।

इससे पहले रक्षा मामलों के जानकार और पूर्व सैन्य अधिकारी प्रवीण साहनी ने बताया कि चीनी वार्ताकारों ने 29 अगस्त को बीजिंग में अपने भारतीय समकक्षों के सामने सैनिकों की वापसी, पेट्रोलिंग और चरागाह व्यवस्था शुरू करने की पेशकश की थी। इसके बाद एलएसी पर गश्ती को लेकर समझौता करने में मदद मिली। साहनी के मुताबिक समझौते को दो चरणों में लागू किया जाना है। पहले चरण में, दोनों देश देपसांग और डेमचोक (पूर्वी लद्दाख में दो शेष टकराव के पॉइंट) में एक-दूसरे के इलाके में दो किलोमीटर अंदर तक गश्त कर सकेंगे और और मवेशियों को चरने के लिए भेजेंगे। वहीं गश्त की जानकारी एक-दूसरे को पहले ही देनी होगी। दोनों देशों को गश्त करने वाले जवानों की संख्या, समय और पेट्रोलिंग की अवधि के बारे में सूचित करना होगा। पेट्रोलिंग की सूचना पहले मिलने से ‘गलतफहमी से बचने’ में मदद मिलेगी।

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