अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने नई योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एलान किया है कि अरुणाचल प्रदेश में किसी बाहरी राज्य के व्यक्ति को प्रवेश करने के लिए इनर लाइन परमिट लेना होगा। इसके जरिये प्रदेश सरकार बाहरी लोगों का डाटा तैयार कर पाएगी। ईटानगर में अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्र संघ के नेताओं के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि राज्य में गैर स्थानीय प्रवासियों के अवैध प्रवेश और लंबे समय तक रहने को रोकने के लिए आईएलपी (इनर लाइन परमिट) प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है। हमारा उद्देश्य स्वदेशी जनजातियों को बाहरी घुसपैठ से बचाना है। इस दौरान अखिल अरुणाचल प्रदेश छात्र संघ के अध्यक्ष दोजी ताना तारा ने एक प्रजेंटेशन के जरिये राज्य में किए गए सर्वे और प्रणाली को मजबूत करने के उपायों के बारे में विस्तार से बताया। बांग्लादेश में हिंसा के बाद से घुसपैठ को लेकर पूर्वोत्तर राज्यों की चिंता बढ़ी हुई है। असम सरकार पहले ही इस पर घुसपैठ पर रोक लगाने के लिए सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके अलावा मेघालय, नागालैंड और मिजोरम भी घुसपैठ रोकने के लिए चितिंत नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों असम सीमा के बाहर बांग्लादेशियों की भीड़ नजर आई थी। अरुणाचल प्रदेश की सीमा भी असम और नागालैंड से लगती है। इसके अलावा चीन, म्यांमार और भूटान से भी प्रदेश की सीमा लगती है। म्यांमार से भी पिछले दिनों देश में घुसपैठ के मामले बढ़े हैं। इसलिए अरुणाचल सरकार ने इनर लाइन परमिट व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि प्रदेश में अगर यह व्यवस्था सफल रहती है तो पूर्वोत्तर के अन्य राज्य भी इसे लागू कर सकते हैं। सरकार ने सड़क, रेल और हवाई मार्गों समेत सीमाओं से प्रदेश में प्रवेश करने वालों के लिए यह व्यवस्था लागू की है।





