राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के लोगों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वहां रहने वाले हिंदुओं को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। यह सुनिश्चित करना हमारे देश की जिम्मेदारी है कि उन्हें किसी तरह के अन्याय और अत्याचार का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आरएसएस मुख्यालय में ध्वजारोहण के बाद यह बात कही। उन्होंने कहा, “आने वाली पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह स्वतंत्रता के ‘स्व’की रक्षा करे। दुनिया में हमेशा ऐसे लोग होते हैं जो दूसरे देशों पर प्रभुत्व जताना चाहते हैं। हमें चौकस और सावधान रहना पड़ता है और उनसे अपनी रक्षा करनी होती है। स्थिति हर समय एक जैसी नहीं रहती है। कभी-कभी यह अच्छी होती है, जबकि कभी यह उतनी अच्छी नहीं होती है।” उन्होंने कहा कि यह उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। भागवत ने कहा, “अब हम स्थिति देख सकते हैं। पड़ोसी देश में काफी हिंसा हो रही है। वहां रहने वाले हिंदुओं को बेवजह हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा कि भारत में दूसरों की मदद करने की परंपरा रही है। हमने पिछले कुछ वर्षों में देखा है कि भारत ने कभी किसी पर हमला नहीं किया। बल्कि मुसीबत में फंसे लोगों की मदद की, भले ही वे हमारे साथ कैसा व्यवहार करें। इस स्थिति में हमें यह देखना होगा कि हमारा देश सुरक्षित रहे। साथ ही अन्य देशों की मदद भी करे। उन्होंने कहा, लोगों को अस्थिरता और अराजकता के कारण किसी तरह की परेशानी, अन्याय और अत्याचार का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना हमारे देश की जिम्मेदारी है। कुछ मामलों में सरकार को अपने स्तर पर देखना होता है। लेकिन उसे ताकत तभी मिलती है, जब समाज अपनी जिम्मेदारी को पूरा करता है और देश के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है।
शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोगों पर कथित तौर पर हमले हो रहे हैं। बांग्लादेश के राष्ट्रीय हिंदू महागठबंधन ने दावा किया कि हसीना के पद से हटने के बाद से अल्पसंख्यक समुदाय को 48 जिलों में 278 जगहों पर हमलों और धमकियों का सामना करना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की टीम पिछले हफ्ते शेख हसीना के इस्तीफे से पहले और उसके बाद प्रदर्शनकारियों की हत्याओं की जांच के लिए जल्द ही बांग्लादेश का दौरा करेगी।
देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11वीं बार लाल किले पर ध्वजारोहण किया। ध्वजारोहण के बाद उन्होंने देशवासियों को संबोधित किया और उनके सामने विकसित भारत का विजन भी रखा। बता दें कि इस साल स्वतंत्रता दिवस की थीम विकसित भारत @2047 है। अपने संबोधन में उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड, बांग्लादेश में जारी हिंसा, देश की बेटियों और एक लाख गैर-राजनीतिक युवाओं के मुद्दों पर बात की। उन्होंने देश की न्याय व्यवस्था पर भी बात की और कहा कि य में विलंब हो रहा है जो कि चिंताजनक है। हमारे देश की न्याय व्यवस्था में सुधार की बहुत जरूरत है। महिलाओं और देश की बेटियों को लेकर पीएम ने कहा कि हर क्षेत्र में महिलाओं के कदम बढ़ रहे हैं। आज महिलाएं नेतृत्व भी दे रही हैं। उन्होंने कहा, “इतने वर्षों में हमने महिला केंद्रित विकास पर काम किया है। हमारी एयरफोर्स, आर्मी, नेवी या स्पेस सेक्टर हर क्षेत्र में महिलाएं शानदार काम कर रही हैं।” महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार पर पीएम मोदी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, “हमें समाज के तौर पर गंभीरता से सोचना पड़ेगा कि महिलाओं के प्रति अत्याचार बंद होना चाहिए। इसे लेकर एक आक्रोश है मैं इसे महसूस कर रहा हूं। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की जल्द से जल्द जांच हो। राक्षसी प्रवृत्ति करने वालों को जल्द कड़ी सजा मिले। मैं ये भी बताना चाहूंगा कि जब बलात्कार की घटनाएं होती हैं तो उसकी बहुत चर्चा होती है तो वो मीडिया में छाया रहता है। लेकिन जब अपराधियों को सजा होती हो तो उसकी खबरें प्रमुखता से नहीं छपती। इसे बदलना चाहिए। अपराधियों में डर पैदा करना जरूरी है।”
पीएम मोदी ने बांग्लादेश में जारी हिंसा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में जो भी हो रहा है, उसे देखकर वह चिंतित हैं। पीएम मोदी ने कहा, “बांग्लादेश में जो कुछ हुआ है। पड़ोस देश होने के नाते हम हालात को लेकर चिंतित हैं। हम उम्मीद करते हैं कि वहा हालात जल्द सामान्य होंगे। साथ ही वहां के हिंदू, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। हमारे पड़ोसी देश सुख और शांति के मार्ग पर चलें। शांति के प्रति हम समर्पित हैं। हम आने वाले दिनों में बांग्लादेश की विकास यात्रा में हमेशा शुभचिंतक रहेंगे। हम मानव जाति के लिए सोचने वाले लोग हैं।”





