नई दिल्ली। हाल ही में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि 9 से 14 नवंबर के बीच सूर्य पर असामान्य स्तर की सौर गतिविधियां दर्ज की गई थीं, जिन्हें समय रहते पहचानकर संभावित बड़े खतरे को टाल दिया गया। इन गतिविधियों में शक्तिशाली सौर विस्फोट और कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई) शामिल थे, जिनका प्रभाव धरती तक पहुंचने पर संचार तंत्र, उपग्रह सेवाओं और बिजली ग्रिड के संचालन पर गंभीर असर डाल सकता था।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अवधि में सूर्य के सतह पर कुछ अत्यंत सक्रिय सनस्पॉट्स दिखाई दिए, जिनसे लगातार तीव्र ऊर्जा विस्फोट निकल रहे थे। शुरुआती विश्लेषण में अनुमान लगाया गया कि इनमें से एक बड़ा सीएमई सीधे धरती की दिशा में बढ़ रहा था। हालांकि बाद के अवलोकनों और उपग्रह डेटा की मदद से वैज्ञानिकों ने इसकी दिशा और प्रभाव का सटीक विश्लेषण किया और पाया कि यह धरती को सीधा नुकसान पहुंचाने की स्थिति में नहीं था।
अंतरिक्ष मौसम निगरानी एजेंसियों ने बताया कि यदि यह विस्फोट धरती से टकराता, तो इससे दूरसंचार, जीपीएस सिस्टम और अंतरिक्ष में मौजूद कई उपग्रह प्रभावित हो सकते थे। चरम स्थिति में यह बिजली आपूर्ति तंत्र पर भी दबाव डाल सकता था, जिसके कारण व्यापक तकनीकी व्यवधान पैदा होने की आशंका रहती। इस खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों ने लगातार पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और सौर विकिरण के स्तर पर नजर बनाए रखी।
विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक पर निर्भर इस आधुनिक युग में सौर गतिविधियों की निगरानी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। असामान्य सौर घटनाएं पृथ्वी के अंतरिक्ष पर्यावरण को प्रभावित करती हैं और कई बार उनका असर धरती पर जीवन और तकनीकी प्रणालियों तक पहुंच जाता है। इसलिए समय रहते चेतावनी और वैज्ञानिक विश्लेषण किसी भी संभावित संकट को रोकने में अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।
सौर गतिविधियों की इस श्रृंखला ने एक बार फिर साबित किया है कि सूर्य की प्रकृति अप्रत्याशित है और उसके व्यवहार पर लगातार वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। अंतरिक्ष एजेंसियों ने आश्वस्त किया है कि भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी जारी रहेगी, ताकि किसी भी बड़े अंतरिक्ष खतरे से पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सके।





