मुंबई/नई दिल्ली: अपनी बेहतरीन कॉमेडी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले राजपाल यादव की जिंदगी का एक ऐसा भी हिस्सा है, जिसने उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचा दिया था। एक अभिनेता जिसकी कुल संपत्ति 85 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जाती है और जो एक फिल्म के लिए 2 करोड़ रुपये तक की फीस लेता है, उसे महज 9 करोड़ रुपये के कर्ज विवाद में तिहाड़ जेल की हवा खानी पड़ी। यह मामला न केवल वित्तीय कुप्रबंधन की कहानी है, बल्कि यह फिल्म इंडस्ट्री के उन जोखिमों को भी उजागर करता है जो एक कलाकार तब उठाता है जब वह ‘मेकर’ (निर्माता) बनने की कोशिश करता है।
विवाद की जड़: ‘अता पता लापता’ और लिया गया कर्ज
राजपाल यादव के संकट की शुरुआत साल 2010-2011 में हुई थी:
- निर्देशन का सपना: राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए उन्हें बड़ी रकम की जरूरत थी।
- 9 करोड़ का लोन: फिल्म बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली के एक व्यवसायी (मैसर्ज मुरली प्रोजेक्ट्स) से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था, जो ब्याज और कानूनी पेचों के साथ बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये हो गया था।
- बॉक्स ऑफिस पर विफलता: साल 2012 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही, जिसके कारण राजपाल यादव की वित्तीय गणना (Financial Calculation) बिगड़ गई और वे कर्ज चुकाने में असमर्थ रहे।
तिहाड़ जाने की नौबत क्यों आई?
राजपाल यादव केवल कर्ज की वजह से जेल नहीं गए, बल्कि उन पर अदालत को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगा था:
- चेक बाउंस का मामला: जब कर्जदाता ने पैसे मांगे, तो राजपाल द्वारा दिए गए चेक बैंक में बाउंस हो गए। इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा।
- झूठा हलफनामा (False Affidavit): कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजपाल यादव पर आरोप लगा कि उन्होंने अपनी संपत्ति और वित्तीय स्थिति के बारे में झूठा हलफनामा पेश किया।
- कोर्ट की अवमानना: अदालत ने माना कि राजपाल यादव बार-बार आश्वासन देने के बावजूद पैसे नहीं लौटा रहे थे और कानून के साथ ‘आंख-मिचौली’ खेल रहे थे। इसी अवमानना के चलते उन्हें 2013 में कुछ दिनों के लिए और फिर 2018 में 3 महीने की जेल की सजा सुनाई गई।
85 करोड़ की संपत्ति बनाम 9 करोड़ का कर्ज
अक्सर सवाल उठता है कि इतनी संपत्ति होने के बावजूद उन्होंने कर्ज क्यों नहीं चुकाया?
- लिक्विडिटी क्राइसिस: कई बार मशहूर हस्तियों की संपत्ति रियल एस्टेट या अन्य निवेशों में फंसी होती है, जिससे उनके पास तुरंत कैश (नकद) की कमी हो जाती है।
- कानूनी लड़ाई: मामला जब कोर्ट में उलझ गया, तो ब्याज की दरों और मूलधन को लेकर खींचतान शुरू हो गई, जिससे विवाद सुलझने के बजाय बढ़ता चला गया।
जेल के अनुभव और वापसी
राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में बिताए समय को अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सबक बताया:
- अनुशासन की सीख: जेल में उन्होंने अन्य कैदियों के साथ समय बिताया और वहां के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया।
- शानदार वापसी: जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने ‘भूल भुलैया 2’ और कई सफल फिल्मों के जरिए खुद को फिर से स्थापित किया। आज वे अपनी पुरानी गलतियों को पीछे छोड़ करियर पर ध्यान दे रहे हैं।





