Wednesday, March 4, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

70 हजार करोड़ के पनडुब्बी सौदे पर बातचीत को मंजूरी

केंद्र सरकार ने देश की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत 70 हजार करोड़ रुपये की लागत से छह आधुनिक पनडुब्बियों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्रालय और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) को इस सौदे पर बातचीत शुरू करने की अनुमति मिल गई है।
जानकारी के मुताबिक, ये पनडुब्बियां जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के सहयोग से भारत में ही बनाई जाएंगी। इनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम (AIP) तकनीक होगी, जिसकी मदद से ये पनडुब्बियां तीन हफ्ते तक लगातार पानी के भीतर रह सकेंगी।
रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस महीने के अंत तक मंत्रालय और एमडीएल के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है। उम्मीद है कि अगले छह महीनों में अनुबंध वार्ता पूरी कर ली जाएगी और अंतिम मंजूरी मिल जाएगी।

उच्च-स्तरीय बैठक में तय हुआ रोडमैप
इस निर्णय पर अंतिम मुहर हाल ही में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में लगी, जिसमें शीर्ष रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी शामिल थे। बैठक में नौसेना की मौजूदा और भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए पनडुब्बी बेड़े के रोडमैप पर चर्चा की गई।
स्वदेशी निर्माण पर जोर
केंद्र सरकार का लक्ष्य न केवल आधुनिक पनडुब्बियों का अधिग्रहण करना है, बल्कि देश में पारंपरिक पनडुब्बियों के डिजाइन और निर्माण की स्वदेशी क्षमता विकसित करना भी है। इसके साथ ही, सरकार पनडुब्बी निर्माण प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम कर रही है।

चीन को जवाब देने की तैयारी

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की यह पहल सीधे तौर पर चीनी नौसेना के तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण को ध्यान में रखते हुए की गई है। मौजूदा समय में चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत को अपने सामरिक हितों की रक्षा के लिए चीन और पाकिस्तान दोनों के मुकाबले खड़े होने वाली क्षमताएं विकसित करनी होंगी।
भारतीय नौसेना अगले दशक में अपनी लगभग 10 पुरानी पनडुब्बियों को चरणबद्ध तरीके से हटाने वाली है। इसलिए, इन्हें बदलने के लिए नई पनडुब्बियों का निर्माण और अधिग्रहण बेहद अहम माना जा रहा है।

निजी क्षेत्र भी निभाएगा भूमिका

जानकारी के अनुसार, भारत का उद्योग जगत भी पनडुब्बी निर्माण परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) परमाणु हमलावर पनडुब्बियों के निर्माण केंद्र के साथ साझेदारी कर रही है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौदा न केवल भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाएगा बल्कि आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगा।

Popular Articles