नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का करीब 1.5 टन वजनी अंतरिक्ष टेलीस्कोप ‘नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी’ 22 साल बाद पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने जा रहा है। 4 नवंबर को इसकी अनियंत्रित री-एंट्री होने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि टेलीस्कोप के कुछ हिस्से वायुमंडल में पूरी तरह नहीं जलेंगे और उनका मलबा धरती तक पहुंच सकता है। दक्षिण भारत के कुछ इलाके संभावित दायरे में हैं।
नासा के अनुसार, यह अंतरिक्ष वेधशाला वर्ष 2004 में लॉन्च की गई थी। इसे शुरुआत में केवल दो साल के मिशन के लिए तैयार किया गया था, लेकिन इसने करीब 22 वर्षों तक अंतरिक्ष में काम किया। इसके तीन टेलीस्कोप ब्रह्मांड में होने वाले शक्तिशाली गामा-रे विस्फोटों और अन्य खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करते रहे हैं।
मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई संभावित क्षेत्र में
अंतरिक्ष एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक, टेलीस्कोप के संभावित री-एंट्री क्षेत्र में 20.6 डिग्री उत्तर और 20.6 डिग्री दक्षिण अक्षांश के बीच का इलाका शामिल है। इस दायरे में भारत के मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहर भी आते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन शहरों में मलबा जरूर गिरेगा। अभी सटीक स्थान का अनुमान लगाना संभव नहीं है।
अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में जल जाएगा
नासा का अनुमान है कि पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय अंतरिक्ष यान का अधिकांश हिस्सा तेज गर्मी के कारण जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, टंगस्टन से बने कुछ भारी उपकरण और दर्पणों के हिस्से बच सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मलबे के समुद्र में गिरने की संभावना अधिक है, क्योंकि पृथ्वी की लगभग 70 प्रतिशत सतह पानी से ढकी है।
नासा ने बताया है कि पृथ्वी पर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका बेहद कम है। अनुमान के मुताबिक, किसी व्यक्ति के इसकी चपेट में आने का जोखिम लगभग 2100 में एक है।
22 साल में किए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन
स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी ने अपने लंबे मिशन के दौरान 2000 से अधिक गामा-रे विस्फोटों और 1400 सुपरनोवा का अध्ययन किया। इसने ब्लैक होल, तारों में होने वाले विस्फोट और अन्य अंतरिक्ष घटनाओं को समझने में वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण मदद की। अब इसका मिशन समाप्त होने के साथ ही अंतरिक्ष में इसकी ऐतिहासिक यात्रा का अंत होने जा रहा है।





