देहरादून।
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पर्यटन विस्तार और औद्योगिक गतिविधियों के कारण आने वाले वर्षों में बिजली की मांग में भारी वृद्धि होने का अनुमान है। ऊर्जा विभाग के आकलन के अनुसार वर्ष 2035 तक राज्य में बिजली की खपत मौजूदा स्तर से लगभग 869 करोड़ यूनिट अधिक हो सकती है।
राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए ऊर्जा परिदृश्य अध्ययन में संकेत दिए गए हैं कि जनसंख्या वृद्धि, इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग, नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तथा पर्यटन ढांचे के विस्तार से बिजली की आवश्यकता लगातार बढ़ेगी। वर्तमान में प्रदेश की बिजली मांग सीमित संसाधनों के सहारे पूरी की जा रही है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति तंत्र को मजबूत करना अनिवार्य माना गया है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दशक में घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली खपत सबसे तेजी से बढ़ेगी। खासकर चारधाम यात्रा मार्गों, नए शहरों के विस्तार और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास से ऊर्जा दबाव और बढ़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य को भविष्य की मांग पूरी करने के लिए जलविद्युत परियोजनाओं के आधुनिकीकरण, सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने तथा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम करना होगा। साथ ही बिजली वितरण प्रणाली को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और लाइन लॉस कम करने पर भी जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाई गई तो आने वाले वर्षों में ऊर्जा घाटे की स्थिति बन सकती है। इसलिए दीर्घकालिक ऊर्जा योजना, निवेश आकर्षित करने और नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई गई है।
सरकार का लक्ष्य है कि बढ़ती मांग के बावजूद राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए।




