वॉशिंगटन/संयुक्त राज्य अमेरिका। वर्ष 2024 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति पर हुए हमले की घटना को लेकर एक नई जांच रिपोर्ट में गंभीर सुरक्षा खामियों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों ने कुल 102 संभावित चेतावनियों (अलर्ट्स) को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक सामने आई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उस समय तैनात एंटी-ड्रोन सिस्टम या तो पूरी तरह से निष्क्रिय था या तकनीकी रूप से ठीक से काम नहीं कर रहा था। इस कारण संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और समय पर प्रतिक्रिया देने में सुरक्षा एजेंसियां विफल रहीं।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर चुनावी रैली के दौरान गोलीबारी हुई थी। घटना ने अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि कई स्तरों पर सूचना साझा करने में देरी हुई और खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी सामने आई। इसके अलावा, भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में ड्रोन गतिविधियों की निगरानी के लिए पर्याप्त तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं थे।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह चूक केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सिस्टम और प्रबंधन स्तर की भी थी। रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की सिफारिश की गई है।
घटना के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी थी, लेकिन इस नई रिपोर्ट ने एक बार फिर सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर सुरक्षा प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं, खासकर उच्च जोखिम वाले राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान।
इस खुलासे के बाद राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में फिर से बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका की वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था वर्तमान खतरों के अनुरूप पर्याप्त मजबूत है या नहीं।
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