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होर्मुज जलडमरूमध्य: भारत के लिए ईरान ने दी बड़ी राहत; ‘दोस्त’ देशों के जहाजों को मिलेगा सुरक्षित रास्ता, ऊर्जा संकट टलने की उम्मीद

तेहरान/नई दिल्ली (26 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को भारत समेत अपने चुनिंदा मित्र देशों के व्यावसायिक जहाजों के लिए खोलने का निर्णय लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनके देश की नौसेना अब साथी देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से निर्बाध और सुरक्षित गुजरने की अनुमति देगी। इस सूची में भारत के साथ-साथ चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के नाम भी शामिल किए गए हैं। ईरान के इस कदम से न केवल भारत की तेल आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट के कम होने की भी प्रबल उम्मीद जगी है।

ईरान की ‘सेफ पैसेज’ नीति: भारत के लिए क्यों है यह खास?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जिसके जरिए वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है:

  • निर्बाध तेल आपूर्ति: भारत अपनी कच्चा तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। युद्ध के कारण इस मार्ग के बंद होने की आशंका से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल का डर था, जो अब कम हो गया है।
  • सुरक्षा का भरोसा: ईरानी विदेश मंत्री ने आश्वासन दिया है कि इन मित्र देशों के जहाजों पर कोई हमला नहीं होगा और ईरानी नौसेना उन्हें ‘सेफ पैसेज’ प्रदान करेगी।
  • विशेष समन्वय की शर्त: हालांकि, ईरान ने एक अनिवार्य शर्त भी रखी है। इस मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों को जलडमरूमध्य में प्रवेश करने से पहले ईरानी अधिकारियों और नौसेना के साथ समन्वय (Coordination) करना होगा, ताकि उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके और किसी भी तरह की गलतफहमी या दुर्घटना से बचा जा सके।

कूटनीतिक जीत: भारत-ईरान संबंधों का असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय के पीछे भारत की संतुलित और सक्रिय कूटनीति का बड़ा हाथ है:

  1. भारत की तटस्थता: पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत ने जिस तरह से संतुलित रुख अपनाया है, ईरान ने उसे सम्मान देते हुए भारत को ‘सुरक्षित देशों’ की श्रेणी में रखा है।
  2. चाबहार का प्रभाव: चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत की भूमिका और ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंधों ने तेहरान को भारत के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
  3. चीन और रूस भी शामिल: ईरान ने इस सूची में उन देशों को प्राथमिकता दी है जिन्होंने मौजूदा संघर्ष में सीधे तौर पर अमेरिका या इजरायल का सैन्य साथ नहीं दिया है।

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