नई दिल्ली/बैंकॉक।
थाईलैंड में चल रहे सीएचओडी 2025 (चीफ ऑफ डिफेंस) सम्मेलन में भारत ने अपनी रणनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई है। भारत की ओर से चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने सम्मेलन में भाग लिया और इस दौरान वियतनाम, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय व बहुपक्षीय वार्ताएं कीं। इन बैठकों में हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, सैन्य सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर विशेष जोर दिया गया।
वियतनाम, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन के साथ उच्चस्तरीय चर्चा
आईडीएस मुख्यालय के अनुसार, एयर मार्शल दीक्षित ने वियतनाम के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, लेफ्टिनेंट जनरल थाई दाई न्गोक, दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ वाइस एडमिरल कांग दोंग जिल और ब्रिटेन के नेवल स्टाफ प्रमुख जनरल सर ग्वेन जेनकिंस से अलग-अलग मुलाकात की।
इन बैठकों में रक्षा सहयोग को गहरा करने, नौसैन्य परिवहन समन्वय बढ़ाने, संयुक्त सैन्य अभ्यासों के विस्तार और अत्याधुनिक तकनीक साझा करने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
इंडो-पैसिफिक कमांड के साथ वार्ता
एयर मार्शल दीक्षित ने अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) के कमांडर एडमिरल सैमुअल पापारो से भी द्विपक्षीय वार्ता की। इस मुलाकात में दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
शांति और स्थिरता के लिए साझा प्रतिबद्धता
आईडीएस मुख्यालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि इन बैठकों ने “रणनीतिक संवाद को गहरा करने, व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा उससे परे शांति, सुरक्षा एवं स्थिरता सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता” को दोहराया।
सम्मेलन में भारत की सक्रिय भूमिका
26 से 28 अगस्त तक आयोजित इस वार्षिक सम्मेलन का आयोजन अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमान और रॉयल थाई सशस्त्र बलों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। यह सम्मेलन हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख देशों के रक्षा प्रमुखों को एक साथ लाने वाला महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष के सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियान, साइबर क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता, आपदा राहत और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
भारत का संदेश स्पष्ट
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत द्वारा वियतनाम, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे रणनीतिक साझेदारों के साथ बैठकों का उद्देश्य स्पष्ट है — हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत अपनी रक्षा साझेदारियों को मजबूत करना चाहता है।
भारत का यह रुख न केवल अपने सामरिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए है, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुले, स्वतंत्र और नियम-आधारित समुद्री ढांचे को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।





