नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारतीय विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस के बीच ‘सुपरजेट-100’ (SSJ100) विमानों के निर्माण को लेकर एक मेगा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हुए इस समझौते के बाद अब इन आधुनिक यात्री विमानों का उत्पादन भारत में ही किया जाएगा। इस कदम से न केवल देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि क्षेत्रीय हवाई संपर्क (Regional Connectivity) को भी जबरदस्त मजबूती मिलेगी।
क्या है ‘सुपरजेट-100’ और क्यों है खास?
सुपरजेट-100 एक आधुनिक ‘रिजनल जेट’ है, जिसे मध्यम दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है।
- यात्री क्षमता: इस विमान में 87 से 100 यात्रियों के बैठने की सुविधा है, जो इसे भारत की ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है।
- किफायती सफर: छोटे शहरों और कस्बों के बीच हवाई यात्रा को सस्ता और सुलभ बनाने में यह विमान गेम-चेंजर साबित होगा।
- तकनीकी विशेषताएं: यह विमान कम लंबाई वाले रनवे पर भी आसानी से लैंड और टेक-ऑफ कर सकता है, जो भारत के पहाड़ी और छोटे हवाई अड्डों के लिए आदर्श है।
समझौते के मुख्य बिंदु: केवल असेंबली नहीं, तकनीक भी मिलेगी
HAL और रूसी मूल उपकरण निर्माता (OEM) के बीच हुई यह डील साधारण खरीद समझौता नहीं है:
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT): रूस इस विमान की महत्वपूर्ण तकनीक भारत को हस्तांतरित करेगा, जिससे भविष्य में भारत खुद के नागरिक विमान विकसित करने में सक्षम होगा।
- स्वदेशी पुर्जे: समझौते के तहत, विमान के कई महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण स्थानीय भारतीय कंपनियों और MSMEs द्वारा किया जाएगा।
- मेंटेनेंस हब: भारत इन विमानों के लिए एक ग्लोबल मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (MRO) हब के रूप में विकसित होगा, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों को भी सेवाएं दी जा सकेंगी।
बोइंग और एयरबस के दबदबे को चुनौती
वर्तमान में भारतीय नागरिक उड्डयन बाजार पर अमेरिकी कंपनी बोइंग और यूरोपीय कंपनी एयरबस का वर्चस्व है। भारत में सुपरजेट-100 के निर्माण से:
- लागत में कमी: स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से विमानों की कीमत और रखरखाव की लागत में भारी गिरावट आएगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत: विमानों के आयात पर खर्च होने वाली अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
रक्षा और नागरिक उड्डयन का मेल
HAL, जो मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों (जैसे तेजस) के लिए जानी जाती है, अब नागरिक उड्डयन क्षेत्र में भी अपनी धाक जमाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगले 10 वर्षों में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक उड्डयन बाजार बन जाए और यह समझौता उस लक्ष्य की प्राप्ति में मील का पत्थर साबित होगा।
“यह समझौता भारत-रूस सामरिक साझेदारी का एक नया अध्याय है। हम न केवल विमान बनाएंगे, बल्कि दुनिया को यह दिखाएंगे कि ‘मेक इन इंडिया’ अब वैश्विक मानकों के नागरिक विमान तैयार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।” — वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा मंत्रालय





