हल्द्वानी: हल्द्वानी तहसील में स्थायी उपजिलाधिकारी (SDM) की नियुक्ति न होने से उपजे जनाक्रोश और प्रशासनिक कार्यों में आ रही बाधा को देखते हुए स्थानीय विधायक सुमित हृदयेश धरने पर बैठ गए। तहसील परिसर में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने उस समय गंभीर रूप ले लिया जब बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय लोग विधायक के समर्थन में उतर आए। विधायक का आरोप था कि कुमाऊं के प्रवेश द्वार और इतने बड़े शहर में स्थायी अधिकारी न होने से जनता के प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी मामले और अन्य महत्वपूर्ण कार्य हफ्तों से लंबित पड़े हैं। हालांकि, देर शाम शासन की ओर से जल्द तैनाती के ठोस आश्वासन के बाद यह धरना समाप्त हुआ।
विरोध की वजह: प्रभारी के भरोसे चल रही तहसील
विधायक सुमित हृदयेश ने धरने के दौरान सरकार और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए:
- कार्य ठप: विधायक ने कहा कि हल्द्वानी जैसी महत्वपूर्ण तहसील को प्रभारी अधिकारियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। स्थायी एसडीएम न होने से जनता को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
- अव्यवस्था का आरोप: आरोप लगाया गया कि सरकार हल्द्वानी की अनदेखी कर रही है, जिससे विकास कार्यों की निगरानी और कानून व्यवस्था की समीक्षा प्रभावित हो रही है।
तहसील परिसर में घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
धरने की खबर मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में कई आला अधिकारी मौके पर पहुंचे:
- कार्यकर्ताओं का हुजूम: तहसील परिसर में जुटे समर्थकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह बाधित रहा।
- प्रशासनिक वार्ता: सिटी मजिस्ट्रेट और अन्य अधिकारियों ने विधायक को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे शासन से लिखित आश्वासन या तत्काल नियुक्ति की मांग पर अड़े रहे।
- जनता की परेशानी: धरने के दौरान विधायक ने कई ऐसे लोगों को मीडिया के सामने पेश किया जिनके आवश्यक दस्तावेज अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण हस्ताक्षरित नहीं हो पा रहे थे।
समझौता: शासन का आश्वासन और धरना समाप्ति
देर शाम जिलाधिकारी और शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हुई:
- ठोस आश्वासन: प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि आगामी दो से तीन दिनों के भीतर हल्द्वानी में स्थायी एसडीएम की तैनाती कर दी जाएगी।
- विधायक का रुख: सुमित हृदयेश ने कहा कि वे जनता के हितों से समझौता नहीं करेंगे। यदि तय समय सीमा के भीतर नियुक्ति नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन और विधानसभा घेराव के लिए मजबूर होंगे।





