Tuesday, February 10, 2026

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हल्द्वानी में अब नहीं लगेंगे सड़क किनारे अनधिकृत ठेले: नगर निगम ने ‘निजी वेंडिंग जोन’ नीति को दी हरी झंडी; शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से मुक्ति

हल्द्वानी: हल्द्वानी शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने और सड़कों पर लगने वाले ठेलों के कारण होने वाले भारी ट्रैफिक जाम को समाप्त करने के लिए नगर निगम ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में ‘निजी वेंडिंग जोन’ (Private Vending Zone) नीति को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। इस नई नीति के तहत अब शहर की मुख्य सड़कों के किनारे ठेले लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध होगा और उन्हें निगम द्वारा चिन्हित निजी भूमि या खाली प्लॉटों पर व्यवस्थित किया जाएगा। इस निर्णय से न केवल शहर की सूरत बदलेगी, बल्कि हजारों रेहड़ी-पटरी संचालकों को भी व्यापार के लिए एक स्थायी और सुरक्षित स्थान मिल सकेगा।

क्या है ‘निजी वेंडिंग जोन’ नीति?

नगर निगम के इस मास्टर प्लान का उद्देश्य सार्वजनिक सड़कों को फुटपाथ और ठेलों से मुक्त करना है:

  • निजी भूमि का उपयोग: शहर के भीतर खाली पड़ी निजी भूमि या प्लॉट के स्वामियों के साथ मिलकर निगम वेंडिंग जोन तैयार करेगा। इसमें भू-स्वामी को भी आय का एक हिस्सा मिलेगा।
  • पंजीकरण अनिवार्य: केवल उन्हीं वेंडरों को इन जोन में जगह दी जाएगी जो नगर निगम के पास पंजीकृत हैं और जिनके पास वैध पहचान पत्र है।
  • सुविधाओं का विकास: इन वेंडिंग जोन में नगर निगम पेयजल, बिजली और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा ताकि ग्राहकों को भी सुविधा हो।

जाम के झाम से मिलेगी बड़ी राहत

हल्द्वानी की मुख्य सड़कों जैसे कालाढूंगी रोड, बरेली रोड और नैनीताल रोड पर ठेलों के कारण यातायात प्रभावित होता था:

  1. सड़क चौड़ीकरण का लाभ: ठेले हटने से सड़कों की पूरी चौड़ाई यातायात के लिए उपलब्ध होगी, जिससे पीक आवर्स के दौरान लगने वाले जाम में कमी आएगी।
  2. पैदल यात्रियों की सुरक्षा: फुटपाथ खाली होने से पैदल चलने वाले यात्रियों को असुरक्षित तरीके से मुख्य सड़क पर नहीं चलना पड़ेगा।
  3. व्यवस्थित शहर: शहर के प्रमुख चौराहों को ‘नो वेंडिंग जोन’ घोषित किया जाएगा, जिससे शहर का स्वरूप अधिक व्यवस्थित और सुंदर नजर आएगा।

रेहड़ी-पटरी संचालकों और भू-स्वामियों को फायदा

इस नीति को इस तरह तैयार किया गया है कि यह सभी पक्षों के लिए लाभकारी साबित हो:

  • वेंडरों की सुरक्षा: पुलिस या प्रशासन द्वारा बार-बार हटाए जाने के डर से वेंडरों को मुक्ति मिलेगी। उनका रोजगार अब अधिक संगठित होगा।
  • राजस्व में वृद्धि: नगर निगम को वेंडिंग शुल्क के रूप में राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग शहर के विकास कार्यों में किया जा सकेगा।
  • भू-स्वामियों के लिए अवसर: जिन लोगों के प्लॉट शहर के बीच खाली पड़े हैं, वे निगम के साथ अनुबंध कर एक नियमित आय प्राप्त कर सकेंगे।

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