हरिद्वार। विश्व प्रसिद्ध हरिद्वार कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के बीच एक नया धार्मिक और प्रशासनिक विवाद गर्मा गया है। हर-की-पैड़ी और आसपास के प्रमुख गंगा घाटों का प्रबंधन करने वाली संस्था ‘श्री गंगा सभा’ ने उत्तराखंड सरकार से बड़ी मांग की है। सभा ने मांग उठाई है कि आगामी अर्धकुंभ से पहले पूरे मेला क्षेत्र और 105 प्रमुख गंगा घाटों को ‘गैर-हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र’ घोषित किया जाए।
“पवित्रता और सुरक्षा के लिए आवश्यक”
सोमवार को हरिद्वार में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि यह मांग सनातन धर्म की आस्था और गंगा की मर्यादा बनाए रखने के लिए की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया:
- ऐतिहासिक संदर्भ: हरिद्वार नगर पालिका के पुराने उपनियमों (Bylaws) का हवाला देते हुए कहा गया कि शहर का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही ‘गैर-हिंदू’ और ‘मद्य-मांस’ निषेध क्षेत्र घोषित है।
- सुरक्षा व्यवस्था: सभा का मानना है कि भव्य और दिव्य कुंभ के साथ-साथ एक “सुरक्षित कुंभ” सुनिश्चित करने के लिए पहचान के आधार पर प्रवेश अनिवार्य होना चाहिए।
- वैश्विक स्थिति: हाल ही में पड़ोसी देशों में हिंदुओं पर हुए हमलों और सांप्रदायिक तनाव का जिक्र करते हुए इसे समय की मांग बताया गया है।
सरकार की ‘सैद्धांतिक सहमति’
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। सरकार हरिद्वार और ऋषिकेश के कुंभ मेला क्षेत्र को ‘पवित्र सनातन नगरी’ घोषित करने की योजना बना रही है। यदि ऐसा होता है, तो देश में पहली बार किसी तीर्थ नगरी में घाटों पर इस तरह के समान धार्मिक नियम लागू होंगे।
2027 अर्धकुंभ की प्रमुख तिथियां
प्रशासन ने पहले ही अर्धकुंभ के लिए स्नान की तिथियां घोषित कर दी हैं, जो इस प्रकार हैं:
- मकर संक्रांति: 14 जनवरी 2027 (मेले का शुभारंभ)
- प्रथम अमृत स्नान (महाशिवरात्रि): 6 मार्च 2027
- द्वितीय अमृत स्नान (फाल्गुन अमावस्या): 8 मार्च 2027
- तृतीय अमृत स्नान (वैशाखी): 14 अप्रैल 2027
- अंतिम स्नान (चैत्र पूर्णिमा): 20 अप्रैल 2027
संतों और अखाड़ों का समर्थन
श्री गंगा सभा की इस मांग को विभिन्न अखाड़ों और संत समाज का भी समर्थन मिल रहा है। संतों का कहना है कि जो लोग गंगा की मूर्ति पूजा या सनातन परंपराओं में विश्वास नहीं रखते, उनका धार्मिक स्थलों पर प्रवेश वर्जित होना चाहिए। हालांकि, इस मांग के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छिड़ने की संभावना जताई जा रही है।





