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हरिद्वार अर्द्धकुंभ से पहले देवभूमि के लिए खुशखबरी: उत्तराखंड में निर्मल हुई पतित पावनी गंगा; नमामि गंगे अभियान का दिखा व्यापक असर, केंद्रीय रिपोर्ट में ‘अप्रदूषित’ घोषित

देहरादून/हर हरिद्वार: उत्तराखंड की पावन धरती पर अगले वर्ष आयोजित होने वाले भव्य हरिद्वार अर्द्धकुंभ-2027 से पहले, राष्ट्रीय नदी गंगा की स्वच्छता और निर्मलता को लेकर एक अत्यंत उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार के महत्त्वाकांक्षी और दूरगामी ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप, अविरल और निर्मल गंगा का जो संकल्प लिया गया था, वह अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। देवभूमि उत्तराखंड में गंगा नदी का जल अब न केवल आचमन के लिए, बल्कि स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी पूरी तरह स्वच्छ और सुरक्षित हो गया है, जो अर्द्धकुंभ के लिए आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी राहत है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मुहर: उत्तराखंड में गंगा अब ‘अप्रदूषित’ श्रेणी में

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की वर्ष 2025 की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड राज्य में गंगा नदी का जल स्तर अब ‘अप्रदूषित’ (Unpolluted) श्रेणी में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए कड़े प्रयासों और वैज्ञानिक उपायों का परिणाम है। रिपोर्ट में बताया गया है कि गंगा नदी के जल में ऑक्सीजन की मात्रा (Dissolved Oxygen) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जबकि जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (BOD) और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया (Coliform Bacteria) के स्तर में भारी कमी दर्ज की गई है। CPCB की यह रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार और नमामि गंगे टीम के लिए एक बड़ी सफलता है और गंगा की स्वच्छता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

नमामि गंगे अभियान की सफलता: 37 परियोजनाएं पूर्ण, सीवेज शोधन क्षमता में 10 गुना वृद्धि

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड में गंगा नदी की स्वच्छता के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 37 प्रमुख परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण की जा चुकी हैं, जिनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), घाटों का निर्माण, और नदी तट का विकास शामिल है। इन परियोजनाओं के फलस्वरूप, राज्य की सीवेज शोधन क्षमता (Sewage Treatment Capacity) में 10 गुना तक की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। अब ऋषिकेश, हरिद्वार, और अन्य प्रमुख शहरों का सीवेज सीधे गंगा में गिरने के बजाय STPs में शोधित किया जा रहा है, जिससे नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

अर्द्धकुंभ-2027 के लिए निर्मल गंगा का स्वागत

अगले साल हरिद्वार में होने वाले अर्द्धकुंभ के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। गंगा नदी की स्वच्छता और निर्मलता अर्द्धकुंभ के सफल आयोजन के लिए एक महत्त्वपूर्ण कारक है। नमामि गंगे कार्यक्रम की सफलता और CPCB की रिपोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और अर्द्धकुंभ प्रशासन को एक नया उत्साह और आत्मविश्वास प्रदान किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गंगा की स्वच्छता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और अर्द्धकुंभ के लिए आने वाले सभी श्रद्धालुओं को एक स्वच्छ और सुरक्षित अनुभव प्रदान करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। गंगा की निर्मलता न केवल उत्तराखंड की पहचान है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का भी एक अभिन्न हिस्सा है।

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